दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से ठीक पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभिजीत दिपके नई दिल्ली स्थित कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें हिरासत में लिया गया। इससे पहले प्रशासन ने अभिजीत दिपके से यह मार्च न निकालने की औपचारिक अपील की थी और उनके दिल्ली स्थित आवास पर जाकर बिना अनुमति मार्च न निकालने संबंधी कानूनी नोटिस भी सौंपा था।
झंडेवालान आवास पर 15 से 20 पुलिसकर्मियों की टीम
दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम दिपके के झंडेवालान स्थित आवास पर पहुंची थी, जो कि उनके एक दोस्त का घर है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 'लहरा दो तिरंगा' मार्च न निकालने की चेतावनी और कानूनी नोटिस देने के लिए 15 से 20 पुलिसकर्मी उनके पते पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस आम जनता से भी अपील कर रही है कि वे सेंट्रल पार्क का रुख न करें क्योंकि वहां धारा 163 प्रभावी है।
गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान और पार्क की बंदी
यह पूरा विवाद सीजेपी के सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ है। पार्टी का आरोप है कि इन सदस्यों को तिरंगा फहराने की वजह से जेल में डाला गया। इसके विरोध में दिपके ने शुक्रवार शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च निकालने की घोषणा की थी। इसके साथ ही सौरव दास और अभिषेक द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई जा रही थी। इस प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर शुक्रवार और शनिवार यानी 16 और 17 अक्टूबर को 2 दिनों के लिए सेंट्रल पार्क को आम जनता के लिए पूरी तरह बंद करने का आदेश जारी कर दिया।
लुटियंस दिल्ली में 6 हजार से अधिक जवानों का कड़ा पहरा
राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बेहद कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। नई दिल्ली के पूरे क्षेत्र में 6 हजार से अधिक दिल्ली पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 220 कंपनियां लगाई गई हैं और पूरे क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। कनॉट प्लेस, राजीव चौक, सेंट्रल पार्क, जंतर-मंतर, पालिका बाजार, नजदीकी मेट्रो स्टेशनों और लुटियंस दिल्ली के संवेदनशील स्थलों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
पटेल चौक, आईटीओ और संसद मार्ग सहित कई महत्वपूर्ण चौराहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों और राहगीरों की कड़ी जांच की जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए अन्य पुलिस जिलों से 5 हजार से अधिक अतिरिक्त जवानों को रिजर्व में रखा गया है। सीएपीएफ की 220 कंपनियां पड़ोसी जिलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर पैनी नजर रख रही हैं। सीएपीएफ की 1 कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं। पूरे दिन के सुरक्षा चक्र को 3 शिफ्टों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक शिफ्ट में सीएपीएफ की 30 कंपनियों की तैनाती तय की गई है। रात के समय भीड़ या आवाजाही बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त जवानों को उतारने का प्रबंध है।
सेंट्रल पार्क बंदी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
एनडीएमसी द्वारा 16 और 17 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क बंद किए जाने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई गई। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने या फौरी सुनवाई करने से साफ मना कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए उम्मीद जताई कि सभी पक्षों द्वारा समझदारी से काम लिया जाएगा।
पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, "हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे. इन दिनों छोटे दुकानदार अपनी आजीविका कमाते हैं. " जस्टिस बागची ने विरोध और व्यवस्था के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, "कोई विरोध करना चाहता है, तो कोई ‘मूंगफली’ बेचना चाहता है, और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है. " पीठ ने संकेत दिया कि यदि व्यापारिक अधिकारों पर अनुचित पाबंदी पाई जाती है तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकती है। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा यह बताए जाने पर कि एनडीएमसी ने गुरुवार देर रात आदेश जारी कर व्यापारियों की आजीविका ठप कर दी, अदालत ने संकेत दिया कि अत्यधिक सख्त कदमों पर समीक्षा के लिए इस याचिका को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।