डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर न घबराएं, इन लक्षणों पर दें ध्यान

Add as Preferred Source on Google News →
विज्ञापन
डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने पर न घबराएं, इन लक्षणों पर दें ध्यान
विज्ञापन

डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले लोगों के मन में प्लेटलेट काउंट को लेकर चिंता होने लगती है और जैसे ही लैब रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 1 लाख 50 हजार से नीचे आते हैं, कई लोग घबरा जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, डेंगू में प्लेटलेट्स का कम होना एक आम बात है और सिर्फ प्लेटलेट काउंट के आंकड़े को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की हालत कितनी गंभीर है और मरीज की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की कमी और अन्य लक्षणों को देखना कहीं ज्यादा जरूरी होता है।

प्लेटलेट्स कम होने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

डेंगू का वायरस शरीर में पहुंचने के बाद कई तरह से प्रभाव डालता है। यह वायरस बोन मैरो यानी हड्डियों के अंदर मौजूद उस हिस्से को प्रभावित कर सकता है जहां प्लेटलेट्स का निर्माण होता है। इससे कुछ समय के लिए प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके अलावा, संक्रमण के दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम भी अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे प्लेटलेट्स जल्दी नष्ट होने लगते हैं। संक्रमण के कारण शरीर की छोटी रक्त नलिकाओं में सूजन और बदलाव आते हैं, जिससे प्लेटलेट्स का इस्तेमाल बढ़ जाता है। आमतौर पर बीमारी के तीसरे से आठवें दिन के बीच प्लेटलेट्स गिर सकते हैं, इसलिए पहले ही दिन प्लेटलेट कम होना जरूरी नहीं है।

40 हजार प्लेटलेट होने पर क्या करें?

जब प्लेटलेट्स 1 लाख 50 हजार से नीचे आते हैं, तो इस स्थिति को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है। डेंगू के दौरान यह काउंट 1 लाख, 50 हजार या 40 हजार तक भी पहुंच सकता है। लेकिन सिर्फ इस आंकड़े को देखकर डरने की जरूरत नहीं है और अगर मरीज को कहीं से ब्लीडिंग नहीं हो रही है, उसका ब्लड प्रेशर सामान्य है, वह पर्याप्त पानी पी पा रहा है और डॉक्टर की निगरानी में है, तो केवल प्लेटलेट कम होने का मतलब यह नहीं है कि बीमारी जानलेवा हो गई है।

इन गंभीर लक्षणों पर रखें पैनी नजर

प्लेटलेट के आंकड़े से ज्यादा महत्वपूर्ण मरीज के लक्षण होते हैं और यदि मरीज में मसूड़ों या नाक से खून आना, उल्टी या मल में खून आना, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी होना, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना, बेचैनी, सांस लेने में परेशानी या पेशाब कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण संकेत देते हैं कि मरीज को तत्काल विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

इलाज और सावधानियां

डेंगू के उपचार में सबसे महत्वपूर्ण बात शरीर में पानी की कमी न होने देना है। यदि मरीज तरल पदार्थ आसानी से पी पा रहा है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य पेय लेने चाहिए। यदि लगातार उल्टी के कारण पानी नहीं रुक रहा है, तो अस्पताल में भर्ती होकर नस के जरिए आईवी फ्लूइड्स लेना जरूरी हो जाता है। बुखार कम करने के लिए आमतौर पर पैरासिटामोल का उपयोग किया जाता है। बिना डॉक्टरी सलाह के एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवाएं कभी नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा काफी बढ़ सकता है।

पपीते के पत्ते का रस और प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन

डेंगू में प्लेटलेट बढ़ाने के लिए पपीते के पत्ते के रस का काफी उपयोग किया जाता है। हालांकि कुछ अध्ययनों में इसके संभावित फायदे बताए गए हैं, लेकिन इसे डेंगू का मानक इलाज नहीं माना जाता है। इसे कभी भी डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज या पानी की कमी को पूरा करने का विकल्प नहीं समझना चाहिए। कुछ लोगों में इसके सेवन से उल्टी भी हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है और जहां तक प्लेटलेट चढ़ाने की बात है, तो यह फैसला डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर लेते हैं। बहुत कम प्लेटलेट होने पर भी अगर ब्लीडिंग नहीं है, तो हर मरीज को प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं पड़ती है।

विज्ञापन