धनतेरस के पावन और शुभ अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में एक ऐतिहासिक और जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की झोली खुशियों से भर दी। विदेशी संस्थागत निवेशकों की तरफ से की गई बंपर खरीदारी के दम पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने लंबी छलांग लगाई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक यानी सेंसेक्स 1,718 रुपये 1 पैसे यानी 2 रुपये 16 पैसे प्रतिशत उछलकर 81,028 रुपये 2 पैसे के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 493 रुपये 75 पैसे यानी 2 रुपये 1 पैसे प्रतिशत चढ़कर 25,030 रुपये 35 पैसे के पार पहुंच गया। दिवाली के इस पावन पर्व से ठीक पहले जब अमेरिका से लेकर एशिया तक के प्रमुख शेयर बाजारों में भारी बिकवाली का दौर चल रहा था, तब दलाल स्ट्रीट की इस शानदार रफ्तार ने घरेलू निवेशकों को बड़ी राहत दी है। बीते कई महीनों से चली आ रही सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए बाजार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि चारों तरफ हरियाली छा गई। हालांकि, यह पूरी तेजी सिर्फ बड़ी कंपनियों यानी लार्जकैप शेयरों तक ही सीमित रही, जबकि छोटे और मंझोले शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव साफ तौर पर नजर आया।
वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संकट कैसे बना भारत के लिए बड़ा वरदान
दुनिया भर के तमाम प्रमुख बाजारों में अचानक आई इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयरों में मची भगदड़ है। अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हराकर डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। इस बड़े सियासी बदलाव के बाद निवेशकों के मन में एक गहरा डर पैदा हो गया है कि अब नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत AI सेक्टर पर बहुत कड़े नियम और कानून लागू किए जाएंगे। इस आशंका से डेटा सेंटरों पर होने वाले भारी-भरकम खर्च के रुकने की संभावना जताई जा रही है। इसी घबराहट और अनिश्चितता के माहौल में अमेरिकी शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स नैस्डैक करीब 6 प्रतिशत तक टूट गया, जो कि मार्च 2020 के कोरोना वायरस क्रैश के बाद से इस सूचकांक की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है। इस बड़े झटके के कारण नैस्डैक अपने पिछले 6 अक्टूबर के रिकॉर्ड उच्च स्तर से 10 प्रतिशत नीचे फिसलकर सीधे करेक्शन जोन में जा पहुंचा है, जबकि एस एंड पी 500 कंपनियों की बाजार हैसियत से करीब 3 ट्रिलियन डॉलर की भारी-भरकम रकम साफ हो गई। वैश्विक चिप निर्माता दिग्गज एनवीडिया का शेयर 9 रुपये 30 पैसे प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि एशियाई बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 9 प्रतिशत से भी ज्यादा टूटकर 5,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे चला गया। इसके अलावा, जापान का निक्केई सूचकांक भी लगभग 7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ।
जहां एक तरफ पूरी दुनिया के वित्तीय बाजार इस अप्रत्याशित गिरावट से सहमे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत को एक एंटी-AI मार्केट होने का सीधा और अप्रत्याशित फायदा मिल रहा है। देश के जाने-माने दिग्गज बैंकर उदय कोटक के अनुसार, वैश्विक कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के पीछे अंधी दौड़ लगाते हुए भारी-भरकम कर्ज ले लिया था, जिसके चलते उनके शेयरों के दाम उनकी वास्तविक कीमत से कहीं ज्यादा महंगे हो गए थे। अब जबकि उन बाजारों से हवा निकल रही है, तो विदेशी निवेशकों का पैसा एक बार फिर सुरक्षित और मजबूत रिटर्न की तलाश में तेजी से भारत की तरफ मुड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों ने तोड़ा पिछले 6 साल का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
बीते सितंबर महीने से लेकर अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक भारतीय शेयर बाजार से लगातार भारी मात्रा में पैसा बाहर निकालने वाले विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII अब पूरी तरह से भारतीय बाजार में आक्रामक खरीदारी के मूड में लौट आए हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शुरुआती और अस्थाई आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार के कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में 14,975 करोड़ रुपये के भारी-भरकम शेयरों की खरीदारी की। यह पिछले करीब 6 सालों में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई एक दिन की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खरीदारी है। महज 5 कारोबारी सत्रों के छोटे से अंतराल में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में लगभग 5 बिलियन डॉलर झोंक दिए हैं, जबकि पिछले 10 कारोबारी सत्रों का कुल नेट इनफ्लो बढ़कर 4 बिलियन डॉलर के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। इसके अलावा, अक्टूबर महीने के दूसरे हिस्से में भी कुल 10 में से 6 सत्रों में उन्होंने जमकर खरीदारी की थी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
दिग्गज और लार्जकैप शेयरों में रौनक, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप रहे मायूस
बाजार की इस ऐतिहासिक रैली की कमान मुख्य रूप से महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी ने संभाली, जिसका शेयर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के बेहद शानदार और उम्मीद से बेहतर नतीजों के बाद 5 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया। प्रतिष्ठित ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने वर्ष 2027 के मजबूत लॉन्च साइकिल को आधार बनाते हुए इस शेयर को अपनी शीर्ष पसंद यानी टॉप पिक बनाए रखा है। इसके अलावा, टाइटन, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस और भारती एयरटेल जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी करीब 2 प्रतिशत की ठोस बढ़त दर्ज की गई। 5 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ, जबकि इसके विपरीत निफ्टी मेटल इंडेक्स 2 प्रतिशत लुढ़क गया। इसके साथ ही एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस और पावर ग्रिड जैसी कंपनियों के शेयर 2 प्रतिशत तक टूटकर लाल निशान में बंद हुए।
एक तरफ जहां बड़ी और दिग्गज कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप यानी मझोले व छोटे शेयरों के निवेशकों को भारी मायूस होना पड़ा। निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 1 रुपये 50 पैसे प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक भी 1 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कुल मिलाकर 2,236 शेयर लाल निशान यानी गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि इसके मुकाबले केवल 937 शेयरों में ही तेजी का रुख देखने को मिला और 99 शेयर बिना किसी उतार-चढ़ाव के सपाट स्तर पर बंद हुए।
कंपनियों के मजबूत नतीजों का मिला सहारा, लेकिन इन जोखिमों से रहना होगा सतर्क
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक अपने वित्तीय परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी 50 समूह की कंपनियों का समेकित नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो बाजार के शुरुआती अनुमानों से करीब 4 प्रतिशत अधिक बेहतर है। टीसीजी एएमसी के प्रबंध निदेशक शहजाद मदन का इस संदर्भ में कहना है कि पिछले दो वर्षों के लगातार सुस्त प्रदर्शन के बाद अब भारतीय शेयरों के मूल्यांकन यानी वैल्यूएशन बिल्कुल सही और आकर्षक स्तर पर आ चुके हैं और देश की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सबसे बुरा दौर अब पूरी तरह पीछे छूट चुका है। वहीं दूसरी तरफ, ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का यह भी मानना है कि आगामी अमेरिकी चुनावों के बाद मध्य पूर्व में ईरान का कूटनीतिक रुख बातचीत के लिए कुछ नरम पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं पर रोक लग सकती है।
हालांकि, बाजार में छाई इस चौतरफा खुशी और उत्साह के बीच कुछ गंभीर खतरे अभी भी अपनी जगह बरकरार हैं और निवेशकों के सिर पर मंडरा रहे हैं। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेहरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़े तीखे बयानों के आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल एक बार फिर उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की कमजोरी और बाजार के उतार-चढ़ाव व जोखिम को मापने वाला सूचकांक इंडिया VIX करीब 8 प्रतिशत की छलांग लगाकर 17 के पास पहुंच गया है। ये तमाम आर्थिक संकेत इस बात की ओर साफ इशारा करते हैं कि निवेशकों को बाजार की इस शानदार तेजी के मौजूदा दौर में भी पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ निवेश करना चाहिए।