अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी नागरिकों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान करने वाले नियमों में व्यापक बदलाव करने के उद्देश्य से दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन आदेशों का मुख्य लक्ष्य 'बर्थ टूरिज्म' (जन्म पर्यटन) के मामलों पर सख्ती करना है, जहां विदेशी नागरिक केवल अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के इरादे से अमेरिका की यात्रा करते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने के पात्र लोगों की संख्या को सीमित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
बर्थ टूरिज्म और प्रवेश सुविधाओं पर प्रतिबंध
इनमें से पहला कार्यकारी आदेश उन लोगों को लक्षित करता है जो व्यावसायिक रूप से बर्थ टूरिज्म का विकल्प चुनते हैं। इस आदेश का स्पष्ट उद्देश्य ऐसे लोगों की अमेरिका में प्रवेश करने की सुविधा को सीमित करना है जो केवल नागरिकता हासिल करने के लिए यहां आते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है ताकि देश की नागरिकता प्रणाली का दुरुपयोग न हो सके। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों के लिए अमेरिका आना और भी चुनौतीपूर्ण बना देगा जिनका प्राथमिक उद्देश्य यहां बच्चे को जन्म देना है।
अपात्रता की परिभाषा में विस्तार
दूसरे कार्यकारी आदेश के माध्यम से उन लोगों की परिभाषा को और अधिक विस्तृत किया गया है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। इस नए बदलाव के तहत, विदेशी सरकारों की ओर से 'लॉबिंग' या पैरवी करने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी नागरिकता की पात्रता से बाहर रखा गया है। यह प्रावधान दर्शाता है कि सरकार उन लोगों के बच्चों को नागरिकता देने के पक्ष में नहीं है जो पेशेवर रूप से विदेशी हितों के लिए काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप की प्रतिक्रिया
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को इस मुद्दे पर झटका दिया था। 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उस पिछले आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 साल से भी अधिक समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखा था, जिसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक माने जाते हैं। वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में इन नए आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए 30 जून के अदालती फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह नया कदम कुछ जरूरी बदलाव करने के लिए उठाया गया है जो देश के हित में हैं।
14वां संशोधन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन, जिसे 9 जुलाई 1868 को अनुमोदित किया गया था, अमेरिका में जन्मे या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करता है। इसमें वे लोग भी शामिल थे जो पहले दास रह चुके थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रावधान गृहयुद्ध के तुरंत बाद बनाया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य दासों के बच्चों को नागरिकता देना था। हालांकि, उन्होंने वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि अब लोग इसके आधार पर पूरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं, जो कि इस कानून के मूल उद्देश्य से अलग है।
स्टीफन मिलर का दृष्टिकोण
ट्रंप की आप्रवासन विरोधी नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी और मिलर ने बताया कि कई लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं, लेकिन उनका वास्तविक और छिपा हुआ उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करना होता है। ऐसा करने से वह बच्चा स्वतः ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। प्रशासन इस प्रक्रिया को एक गंभीर समस्या के रूप में देख रहा है और इन नए कार्यकारी आदेशों के माध्यम से इस पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।