अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने खुद को 'वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति' बताया है और यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चर्चा का विषय बन गया है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ कई। महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई का इतिहास
इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन के तहत, वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए गए। यह कार्रवाई वेनेजुएला की संप्रभुता पर एक सीधा हमला मानी गई और इसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ा दिया। इस घटना ने दुनिया भर में कई देशों को चौंका। दिया और अमेरिकी विदेश नीति की आक्रामकता पर सवाल खड़े किए।
ट्रंप का वेनेजुएला को 'चलाने' का बयान
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अमेरिका "वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक हम एक सुरक्षित, सही और समझदारी वाला ट्रांज़िशन नहीं कर लेते। " उन्होंने यह भी जोड़ा था कि "हम यह जोखिम नहीं ले सकते कि कोई और वेनेजुएला पर कब्ज़ा कर ले जिसके मन में वेनेजुएला के लोगों का हित न हो और " यह बयान अमेरिका की ओर से वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मंशा को दर्शाता है और यह भी बताता है कि अमेरिका अपनी शर्तों पर सत्ता परिवर्तन चाहता है। ट्रंप के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका वेनेजुएला के भविष्य को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार आकार देना चाहता है।
डेल्सी रोड्रिग्ज का अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण
अमेरिकी कार्रवाई के बाद, वेनेजुएला की कमान उसकी वाइस प्रेसिडेंट और तेल मंत्री, डेल्सी रोड्रिग्ज के हाथ में सौंपी गई थी और उन्होंने पिछले हफ़्ते औपचारिक रूप से देश की अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली। यह कदम वेनेजुएला में एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत का प्रतीक था, हालांकि यह अमेरिकी दबाव के तहत हुआ था। रोड्रिग्ज की नियुक्ति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, कुछ देशों ने इसे वैध माना जबकि अन्य ने इसे अमेरिकी हस्तक्षेप का परिणाम बताया। इस संक्रमण काल में वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
तेल आपूर्ति पर अमेरिकी मांगें
डेल्सी रोड्रिग्ज के अंतरिम राष्ट्रपति बनने के बाद, ट्रंप ने तुरंत अपनी मांगें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारी अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल "उच्च-गुणवत्ता वाला, स्वीकृत तेल" देंगे, जिसे बाजार कीमत पर बेचा जाएगा। यह मांग वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने की इच्छा को दर्शाती है और। यह भी बताती है कि अमेरिका अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वेनेजुएला के संसाधनों का उपयोग करना चाहता है। यह आर्थिक दबाव वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को और भी कमजोर कर सकता है, जो पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही है।
वेनेजुएला पर भू-राजनीतिक दबाव
इससे पहले भी, ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला पर यह दबाव बना रहा था कि वह चीन, रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों के साथ अपने आर्थिक संबंध खत्म करे और एबीसी न्यूज सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई थी कि ट्रंप प्रशासन चाहता है कि वेनेजुएला तेल उत्पादन के लिए सिर्फ अमेरिका के साथ पार्टनरशिप करे और कच्चा तेल बेचते समय अमेरिका को प्राथमिकता दे। यह रणनीति वेनेजुएला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और। उसे पूरी तरह से अमेरिकी प्रभाव में लाने का प्रयास है। यह कदम वेनेजुएला की विदेश नीति और उसके वैश्विक सहयोगियों पर गहरा असर डालेगा।
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव
डोनाल्ड ट्रंप का खुद को 'वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति' घोषित करना और वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव की ये श्रृंखला वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों पर सवाल उठाता है। वेनेजुएला का भविष्य और उसके तेल संसाधनों का नियंत्रण अब एक जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है, जिसमें कई बड़े खिलाड़ी शामिल हैं। यह देखना बाकी है कि इस स्थिति का अंतिम परिणाम क्या होगा और वेनेजुएला के लोग इस नए राजनीतिक परिदृश्य में कैसे प्रतिक्रिया देंगे। इस पूरे घटनाक्रम का लैटिन अमेरिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।