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खामेनेई की मौत से मध्य पूर्व में हाहाकार… पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों में आक्रोश

खामेनेई की मौत से मध्य पूर्व में हाहाकार… पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों में आक्रोश
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद पूरे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में भारी तनाव व्याप्त हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए एक कथित हमले में 86 वर्षीय खामेनेई की मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल ईरान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर शिया मुस्लिम समुदाय के बीच तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई दशकों से ईरान के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक पद पर आसीन थे और उन्हें शिया जगत के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता था। उनकी मृत्यु के बाद पाकिस्तान से लेकर लेबनान तक सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है।

पाकिस्तान में व्यापक हिंसा और हताहतों की संख्या

पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जिसे रोकने के लिए सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा। इस्लामाबाद में राजनयिक एन्क्लेव के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भीषण झड़पें हुईं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उत्तरी शहरों में संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों को भी निशाना बनाया गया है। इन झड़पों में अब तक कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई है और 120 से अधिक लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान की शिया राजनीतिक पार्टी के प्रमुख सैयद हुसैन मुकद्दसी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है।

लेबनान और इजराइल के बीच सैन्य संघर्ष में तेजी

लेबनान में ईरान समर्थित समूह हिज्बुल्लाह ने खामेनेई की मौत के प्रतिशोध में इजराइल पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं और रिपोर्टों के अनुसार, एक साल से अधिक समय में यह पहली बार है जब हिज्बुल्लाह ने इतनी बड़ी संख्या में इजराइली क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में इजराइली रक्षा बलों ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में व्यापक हवाई हमले किए हैं। इजराइल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 100,000 रिजर्व सैनिकों को ड्यूटी पर बुला लिया है और दक्षिणी लेबनान की सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी है। इस सैन्य कार्रवाई के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों से हजारों नागरिकों को विस्थापित होना पड़ा है।

इराक और भारत में विरोध प्रदर्शनों का विस्तार

इराक की राजधानी बगदाद में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रदर्शनकारियों ने ग्रीन ज़ोन के पास स्थित अमेरिकी दूतावास तक पहुँचने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इराक के विभिन्न प्रांतों में शिया समुदायों ने शोक सभाएं आयोजित की हैं और अमेरिका विरोधी नारे लगाए हैं। भारत में भी जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए लोग सड़कों पर निकले। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा और शिया जगत पर प्रभाव

विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के अनुसार, खामेनेई की मृत्यु का मनोवैज्ञानिक प्रभाव अत्यंत गहरा है। ब्रिटेन स्थित थिंक टैंक रूसी की सीनियर रिसर्चर बुरकु ओजेलिक के अनुसार, इराक, बहरीन, लेबनान और यमन जैसे देशों में जहां बड़ी शिया आबादी है, वहां इस घटना के दीर्घकालिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ईरान की विदेश नीति लंबे समय से इन देशों में सक्रिय रही है, जहां उसने हूती और हिज्बुल्लाह जैसे समूहों के साथ मजबूत गठबंधन बनाए हैं। तेहरान इन हस्तक्षेपों को शिया हितों की रक्षा के रूप में देखता रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में की जाती रही है। वर्तमान संघर्ष ने क्षेत्र में अस्थिरता के एक नए दौर की शुरुआत कर दी है।

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