ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि ईरान के नए रक्षा मंत्री सैयद माजिद अब अल-रेज़ा एक हमले में मारे गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सैयद माजिद ने महज 24 घंटे पहले ही देश के रक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। यह हमला उस समय हुआ जब ईरान पहले से ही अपने शीर्ष नेतृत्व के नुकसान से जूझ रहा है। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करने के उद्देश्य से की गई है।
ईरान में पिछले कुछ दिनों से स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है और रविवार को हुए एक अन्य हमले में पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह की भी मौत हो गई थी। इसके तुरंत बाद सैयद माजिद अब अल-रेज़ा को नया रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था, लेकिन पद संभालने के एक दिन के भीतर ही उनकी मौत की खबर ने ईरानी प्रशासन को गहरे संकट में डाल दिया है। पश्चिमी एशिया में इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
नए रक्षा मंत्री पर हमले का विवरण और घटनाक्रम
इजरायली रक्षा बलों के दावों के अनुसार, सैयद माजिद अब अल-रेज़ा को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में सटीक खुफिया जानकारी का उपयोग किया गया था। बताया जा रहा है कि जिस समय यह हमला हुआ, उस समय रक्षा मंत्री एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए जा रहे थे। इजरायल ने इस ऑपरेशन को अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताया है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस विशिष्ट दावे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय सूत्रों ने भारी नुकसान की पुष्टि की है।
पूर्व सैन्य नेतृत्व और रक्षा परिषद को हुआ नुकसान
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रविवार को जानकारी दी थी कि देश की रक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक को निशाना बनाकर हवाई हमला किया गया था। इस हमले में ईरान के सैन्य प्रमुख जनरल अब्दोल रहीम मूसावी और तत्कालीन रक्षा मंत्री जनरल अजीज नासिरजादेह की मौत हो गई थी। इससे पहले रविवार सुबह ही ईरान ने अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी की मौत की भी घोषणा की थी। एक के बाद एक शीर्ष अधिकारियों की मौत ने ईरान के रक्षा ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई
शनिवार से शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया। रविवार को आई खबरों के अनुसार, सर्वोच्च नेता खामेनेई की भी एक हमले में मौत हो गई है और अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह हमले ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल विकास गतिविधियों को रोकने के लिए किए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में ईरानी जनता को संबोधित करते हुए मौजूदा शासन के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया है।
ईरान में मानवीय संकट और हताहतों के आंकड़े
ईरानी रेड क्रीसेंट सोसायटी द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों में अब तक ईरान में कम से कम 787 लोगों की मौत हो चुकी है। रेड क्रीसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश जारी कर बताया कि मृतकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है क्योंकि कई इलाकों में अभी भी बचाव कार्य जारी है और शनिवार को हुए हमलों के बाद से ही ईरान के विभिन्न शहरों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे आम नागरिकों के लिए संकट पैदा हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य की सैन्य रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक आवश्यक समझा जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान पर भारी और सटीक बमबारी पूरे सप्ताह या उससे अधिक समय तक चल सकती है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते इस संघर्ष पर नजर बनाए हुए है। इजरायल का दावा है कि उनके हमले केवल सैन्य ठिकानों और नेतृत्व तक सीमित हैं, जबकि ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। क्षेत्र में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं और सैन्य गतिविधियां तेज होती जा रही हैं।