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पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने 8 देशों के नेताओं से की बात।

पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने 8 देशों के नेताओं से की बात।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 48 घंटों के भीतर पश्चिम एशिया के आठ प्रमुख देशों के नेताओं के साथ टेलीफोन पर गहन कूटनीतिक बातचीत की है। इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इजरायल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर के शीर्ष नेतृत्व से संवाद किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने इस संघर्ष के व्यापक रूप लेने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से तत्काल संयम बरतने का आग्रह किया है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए बातचीत और कूटनीति के मार्ग का समर्थन करती है।

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां इसके अन्य देशों में फैलने का खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। भारत इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर भारत के राष्ट्रीय हितों पर पड़ता है। विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान भी स्थिति में सुधार होने के बजाय गिरावट देखी जा रही है, जो वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर चुनौती है।

आठ देशों के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो दिनों में पश्चिम एशिया के आठ महत्वपूर्ण देशों के प्रमुखों से संपर्क साधा है। इस दौरान उन्होंने ओमान के सुल्तान और कुवैत के क्राउन प्रिंस के साथ विशेष रूप से वहां रह रहे भारतीय समुदाय की भलाई पर चर्चा की। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री ने कतर पर हुए हमलों की निंदा की और वहां भारतीय नागरिकों की देखभाल के लिए अमीर का आभार व्यक्त किया। इन वार्ताओं में सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन जैसे देशों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी देशों के नेताओं ने भारत की चिंताओं को गंभीरता से लिया है और शांति के प्रयासों में सहयोग का आश्वासन दिया है।

भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोपरि

भारत के लिए इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील पहलू खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि इन नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने अपनी बातचीत के दौरान संबंधित देशों के नेतृत्व से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि संघर्ष की स्थिति में भारतीय समुदाय को किसी भी प्रकार की असुरक्षा का सामना न करना पड़े। खाड़ी देशों में भारतीय कार्यबल न केवल भारत की अर्थव्यवस्था में प्रेषण (Remittance) के माध्यम से योगदान देता है, बल्कि उन देशों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार सामुदायिक संगठनों के संपर्क में हैं और नियमित रूप से सुरक्षा परामर्श जारी कर रहे हैं।

व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर संभावित प्रभाव

पश्चिम एशिया का यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, किसी भी प्रकार की बड़ी रुकावट का भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि हाल के दिनों में ऐसे हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों की जान गई है और कुछ लापता हुए हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख और कूटनीतिक अपील

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में 28 फरवरी को व्यक्त की गई चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि भारत शुरू से ही तनाव कम करने के पक्ष में रहा है। मंत्रालय के अनुसार, भारत ने सभी पक्षों से आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने का आह्वान किया है। भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय मेज पर बैठकर बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए। विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं ताकि बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रखी जा सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह देश के हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की आवाज बुलंद करती रहेगी।

समुद्री सुरक्षा और मर्चेंट शिपिंग की रक्षा

हाल के घटनाक्रमों में लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाना भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह समुद्री डकैती और जहाजों पर मिसाइल या ड्रोन हमलों के खिलाफ है। चूंकि भारतीय नागरिक वैश्विक मर्चेंट नेवी कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सीधे तौर पर भारत से जुड़ी है और विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियां क्षेत्र में स्थिति की निगरानी कर रही हैं। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्बाध आवाजाही वैश्विक व्यापार की रीढ़ है और इसे किसी भी सैन्य संघर्ष का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।

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