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ईरान-अमेरिका संघर्ष: ट्रंप बोले, बातचीत का समय अब निकल चुका है

ईरान-अमेरिका संघर्ष: ट्रंप बोले, बातचीत का समय अब निकल चुका है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 3 मार्च को पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, ईरान के नेतृत्व ने मौजूदा युद्ध को रोकने के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने ईरान के भीतर व्यापक तबाही मचाई है। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान की सैन्य शक्ति और रणनीतिक बुनियादी ढांचा अब उस स्थिति में नहीं है कि वह किसी सार्थक समझौते की मेज पर बैठ सके।

सैन्य अभियानों और ट्रंप के दावों का विवरण

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी दी कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, वायु सेना और नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान का नेतृत्व अब पूरी तरह से बिखर चुका है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए लक्षित हमलों ने ईरान की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है और रिपब्लिकन नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना के पास अपने अभियानों को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता है, जो पूर्व में अनुमानित चार से पांच सप्ताह की समय सीमा से कहीं अधिक है। अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को स्थायी रूप से कमजोर करना है।

सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत और नेतृत्व का संकट

28 फरवरी से शुरू हुए इस सैन्य अभियान में ईरान को सबसे बड़ा झटका उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के रूप में लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान में किए गए सटीक हमलों में खामेनेई के साथ-साथ कई अन्य वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं। इस घटना ने ईरान के भीतर एक बड़ा नेतृत्व संकट पैदा कर दिया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने से ईरानी कमांड और कंट्रोल सिस्टम में भारी व्यवधान आया है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी भी छिटपुट जवाबी कार्रवाइयां जारी हैं, लेकिन नेतृत्व की अनुपस्थिति में उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और अमेरिकी दूतावासों पर हमले

ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ईरानी ड्रोन और मिसाइलों ने सऊदी अरब और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण दूतावास परिसरों में आग लग गई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, अमेरिका ने पश्चिम एशिया के कई देशों में अपने दूतावासों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके साथ ही, गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को तत्काल क्षेत्र छोड़ने और स्वदेश लौटने का आदेश दिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर अपने हमले जारी रखेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा संकट

युद्ध का प्रभाव अब वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी दिखने लगा है और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने के लिए मिसाइल और ड्रोन तैनात किए हैं। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा यहीं से गुजरता है। ईरान द्वारा पड़ोसी अरब देशों पर भी मिसाइलें दागी गई हैं, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मार्ग पर तनाव जारी रहा, तो वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

हताहतों की संख्या और मानवीय स्थिति

ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों में अब तक कम से कम 787 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में बड़ी संख्या में सैन्य कर्मियों के साथ-साथ नागरिक भी शामिल हैं। दूसरी ओर, इजराइल के भीतर ईरानी मिसाइल हमलों में अब तक 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मानवीय संगठनों ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा आपूर्ति और भोजन की कमी पर चिंता व्यक्त की है और पूरे पश्चिम एशिया में इस समय भय और अनिश्चितता का माहौल है, और नागरिक सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

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