इजराइल में सरकार गठन की रेस में आगे बढ़े आइसेनकोट, नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलें

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इजराइल में सरकार गठन की रेस में आगे बढ़े आइसेनकोट, नेतन्याहू की बढ़ी मुश्किलें
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पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं। हालांकि राजनीतिक स्थिति अभी भी बेहद जटिल बनी हुई है और संसद में बहुमत हासिल करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 27 अक्टूबर को हुए चुनावों के बाद विपक्षी उम्मीदवार गादी आइसेनकोट को गठबंधन सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। पूर्व सैन्य प्रमुख आइसेनकोट, जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनाव लड़े थे, अब नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के अपने प्रयासों में आगे हैं और आइसेनकोट के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय है और जरूरत पड़ने पर उन्हें 14 दिन और मिल सकते हैं।

देश के हालात और राजनीतिक पृष्ठभूमि

तारीख 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों और उसके बाद गाजा तथा अन्य जगहों पर तीन साल से चल रहे संघर्षों ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस सप्ताह राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत में इजराइल के अधिकांश प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी आइसेनकोट को सौंपी जानी चाहिए। हालांकि, संसद में बहुमत हासिल करना अभी भी एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले महीने हुए चुनावों में नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने संसद में अपना बहुमत खो दिया था, लेकिन आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गुट को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। नतीजतन, अरब पार्टियां, जिन्होंने इस चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है, संभावित किंगमेकर बनकर उभरी हैं, हालांकि राजनीतिक स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है।

इजराइल के इतिहास में कोई अरब पार्टी केवल एक बार ही गठबंधन सरकार का हिस्सा रही है। गाजा में चल रहे संघर्ष को देखते हुए, जो अब तीन साल से अधिक समय से जारी है, इस तरह का गठबंधन बनाना आइसेनकोट के लिए काफी विवादास्पद साबित हो सकता है। इजराइली संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं, इसलिए सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जादुई जरूरत होती है। आइसेनकोट के नेतन्याहू-विरोधी गुट के पास 48 सीटें हैं। उनकी अपनी याशर पार्टी के पास 21 सीटें, टुगेदर के पास 12 सीटें, द डेमोक्रेट्स के पास 8 सीटें और यिसरायल बेतेनु के पास 7 सीटें हैं। इसमें दो अरब पार्टियों संयुक्त सूची यानी जॉइंट लिस्ट और राअम की 19 सीटें और जुड़ जाती हैं, जिससे कुल संख्या 67 सीटें हो जाती हैं। लेकिन नेतन्याहू को नापसंद करने के अलावा इन पार्टियों के बीच और कोई खास समानता नहीं है, जो अगले चार हफ्तों में बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है।

नेतन्याहू का अभियान और विरोध

एपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइसेनकोट और अरब पार्टियों के बीच किसी भी तरह के गठबंधन को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। उन्होंने यहां तक दावा किया है बिना कोई सबूत दिए कि अरब पार्टियों ने चुनाव चुरा लिया है। हर्जोग की घोषणा से कुछ समय पहले नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवादियों के समर्थकों को शामिल करने वाली सरकार के जल्दबाजी में शपथ लेने के खिलाफ चेतावनी दी, जो एक ऐसा बयान है जिसका इस्तेमाल वे अक्सर अरब पार्टियों के लिए करते हैं। नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने बार-बार अरब पार्टियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। इसके विपरीत, आइसेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ उनके साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई है, खास तौर पर यह शर्त कि वे हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दें और उसे पूरी तरह खत्म करने का समर्थन करें।

आइसेनकोट और नेतन्याहू, जिनकी पार्टी लिकुड संसद में सबसे बड़ी पार्टी है, संभवतः प्रमुख यहूदी पार्टियों के साथ मिलकर एक व्यापक एकता सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, कई मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद हैं जिन्हें सुलझाना बेहद मुश्किल होगा। ऐसा ही एक मुद्दा धार्मिक पार्टियों पर नेतन्याहू की निर्भरता है, क्योंकि ये पार्टियां मांग करती हैं कि अति-रूढ़िवादी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट दी जाए। विवाद का एक और बड़ा कारण 7 अक्टूबर के हमलों से जुड़ी विफलताओं की औपचारिक जांच का नेतन्याहू द्वारा विरोध करना है। आइसेनकोट एक अल्पसंख्यक सरकार बनाने पर भी विचार कर सकते हैं, जिसे अरब पार्टियों का बाहरी समर्थन प्राप्त हो, हालांकि ये पार्टियां गठबंधन की औपचारिक सदस्य नहीं होंगी। लेकिन, उनके गुट के अन्य सदस्यों ने कहा है कि वे ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे।

पार्टियों की प्रतिक्रिया और राजनीतिक भविष्य

आइसेनकोट की पार्टी याशर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री के वीडियो की आलोचना की। उन्होंने नेतन्याहू की पार्टी लिकुड के सदस्यों से आग्रह किया कि वे कट्टरपंथी पार्टियों के साथ अपना गठबंधन तोड़ लें, संभवतः यहां इशारा उन अति-दक्षिणपंथी पार्टियों की ओर है जो नेतन्याहू के धार्मिक-राष्ट्रवादी समर्थक आधार का हिस्सा हैं। बयान में कहा गया है कि आइसेनकोट केवल उन्हीं पार्टियों और सांसदों के साथ जुड़ेंगे जो उनके सिद्धांतों का समर्थन करते हैं। आने वाले 28 दिन इजराइल के राजनीतिक भविष्य और नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि देश के सामने एक तरफ आंतरिक राजनीतिक गतिरोध है तो दूसरी तरफ क्षेत्रीय संघर्ष की बड़ी चुनौतियां हैं।

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