वैश्विक वित्तीय बाजार में इन दिनों काफी हलचल देखी जा रही है क्योंकि अमेरिका की 30 साल की बॉन्ड यील्ड वर्ष 2004 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड में इस बढ़ोतरी के साथ साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बदलाव की चिंताओं ने भारतीय शेयर बाजार पर काफी दबाव पैदा किया है और ऐसे अनिश्चित समय में नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ एक सुरक्षित और भरोसेमंद बचत का माध्यम बनकर उभरता है।
ईपीएफ योजना 2026 के तहत नए बदलाव
कर्मचारी भविष्य निधि को अब केवल रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली एकमुश्त राशि के रूप में नहीं देखा जाता है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारी अपने पीएफ खाते से आंशिक निकासी भी कर सकते हैं और ईपीएफ योजना 2026 के लागू होने के बाद आंशिक निकासी के नियमों को पहले की तुलना में काफी सरल और सुलभ बनाया गया है। विशेष रूप से घर खरीदने, नया मकान बनाने, होम लोन का भुगतान करने या पुराने मकान की मरम्मत और रिनोवेशन के लिए पीएफ से पैसा निकालने के प्रावधानों में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं ताकि कर्मचारियों को अपनी आवास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में आसानी हो सके।
12 महीने की सदस्यता की अनिवार्यता
नए नियमों के अनुसार आवास से जुड़ी किसी भी प्रकार की पीएफ निकासी के लिए कर्मचारी की कुल ईपीएफ सदस्यता कम से कम 12 महीने होनी चाहिए। एक बार जब कर्मचारी अपनी सदस्यता के 12 महीने पूरे कर लेता है, तो वह घर से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए राशि निकालने का पात्र हो जाता है। इस पात्रता के तहत कर्मचारी नया घर या फ्लैट खरीद सकता है, आवासीय प्लॉट की खरीदारी कर सकता है, अपने प्लॉट पर घर का निर्माण करवा सकता है, पुराने होम लोन की किस्तों का भुगतान कर सकता है या फिर अपने वर्तमान घर की मरम्मत और साज सज्जा का काम करवा सकता है।
निकासी की सीमा और पात्र बैलेंस का गणित
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव निकासी की सीमा को लेकर किया गया है। अब निकासी की राशि कर्मचारी के एलिजिबल मेंबर बैलेंस यानी पात्र सदस्य शेष से जुड़ी हुई है और आवास संबंधी जरूरतों के लिए कर्मचारी अपने पात्र सदस्य शेष का 100 प्रतिशत तक निकाल सकता है, लेकिन यहां एक अनिवार्य शर्त यह है कि पीएफ खाते में कुल बैलेंस का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा हमेशा बनाए रखना होगा। इसे सरल शब्दों में समझें तो कर्मचारी अपने उपलब्ध पात्र पीएफ बैलेंस का प्रभावी रूप से 75 प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत रकम भविष्य में रिटायरमेंट की सुरक्षा के लिए खाते में ही जमा रहेगी।
किन आवास संबंधी कार्यों के लिए मिलेगा पैसा
ईपीएफ की हाउसिंग कैटेगरी में खर्चों का एक विस्तृत दायरा शामिल किया गया है। कर्मचारी निम्नलिखित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अपने पीएफ खाते से निकासी के लिए आवेदन कर सकता है: नया घर, फ्लैट या प्लॉट खरीदना, अपने स्वामित्व वाली जमीन पर नया घर बनाना, बैंक या वित्तीय संस्थान से लिए गए होम लोन का पुनर्भुगतान करना, वर्तमान घर की मरम्मत, रिनोवेशन या उसमें जरूरी बदलाव करना। नियमों के मुताबिक इस हाउसिंग कैटेगरी के तहत निकासी की सुविधा पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार ली जा सकती है, जो कर्मचारियों को अलग अलग समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
वेतन के बजाय अब बैलेंस पर आधारित गणना
पुराने नियमों में निकासी की सीमा अक्सर कर्मचारी के मासिक वेतन के गुणकों के आधार पर तय की जाती थी, लेकिन नए ढांचे में गणना का मुख्य आधार पात्र सदस्य शेष को बनाया गया है। इसका अर्थ यह है कि आपके पीएफ खाते में जितनी राशि जमा होगी, उसी के अनुपात में आपकी निकासी राशि तय की जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का पात्र पीएफ बैलेंस 10 लाख रुपये है, तो 25 प्रतिशत यानी 2 लाख 50 हजार रुपये खाते में बनाए रखने की शर्त के कारण वह लगभग 7 लाख 50 हजार रुपये तक की निकासी कर सकता है। हालांकि वास्तविक स्वीकृत राशि ईपीएफओ के रिकॉर्ड और उस समय लागू अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी।
UAN और KYC का अपडेट होना जरूरी
पीएफ से निकासी की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि कर्मचारी का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन सक्रिय हो और उसके केवाईसी दस्तावेज पूरी तरह अपडेट हों। बैंक खाते की जानकारी, आधार नंबर और सदस्य से जुड़ी अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ईपीएफओ के डेटाबेस में सही होनी चाहिए और यदि बैंक विवरण में कोई त्रुटि होती है या केवाईसी दस्तावेजों में कोई अंतर पाया जाता है, तो निकासी का दावा अटक सकता है। नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और स्वचालित बनाना है, जिससे कर्मचारियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
पति और पत्नी दोनों के सदस्य होने पर नियम
यदि किसी परिवार में पति और पत्नी दोनों ही अलग अलग ईपीएफ सदस्य हैं और अपनी 12 महीने की सदस्यता की शर्त पूरी करते हैं, तो वे दोनों एक ही संपत्ति से जुड़े आवास खर्चों के लिए अपने अपने पीएफ खाते से निकासी कर सकते हैं। हालांकि दोनों की निकासी की सीमा उनके व्यक्तिगत पीएफ बैलेंस और उन पर लागू होने वाली शर्तों के आधार पर अलग अलग तय की जाएगी। यह प्रावधान उन परिवारों के लिए बहुत मददगार है जो संयुक्त रूप से घर खरीदने या बनाने की योजना बना रहे हैं।
निष्कर्ष
ईपीएफ के नए नियमों ने घर से जुड़े खर्चों के लिए पीएफ निकालने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सरल बना दिया है। 12 महीने की न्यूनतम सदस्यता पूरी करने के बाद पात्र सदस्य अपनी जरूरतों के हिसाब से राशि निकाल सकते हैं। हालांकि 25 प्रतिशत बैलेंस को खाते में सुरक्षित रखने का नियम यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट के बाद की वित्तीय योजना भी प्रभावित न हो।