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फारूक अब्दुल्ला पर हमले की कोशिश: जम्मू में कमल सिंह गिरफ्तार

फारूक अब्दुल्ला पर हमले की कोशिश: जम्मू में कमल सिंह गिरफ्तार
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार देर शाम जम्मू में एक जानलेवा हमले की कोशिश की गई। यह घटना उस समय हुई जब अब्दुल्ला ग्रेटर कैलाश इलाके में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे और अधिकारियों के अनुसार, हमलावर ने पूर्व मुख्यमंत्री के सिर पर पिस्तौल तान दी थी, लेकिन वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे दबोच लिया और एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।

डॉ फारूक अब्दुल्ला वर्तमान में Z+ श्रेणी की सुरक्षा में रहते हैं। घटना के समय उनके साथ जम्मू-कश्मीर सरकार के कई वरिष्ठ नेता और सुरक्षा घेरा मौजूद था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उसके पास से एक लाइसेंसी पिस्तौल बरामद की है। इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

शादी समारोह के दौरान हमले का घटनाक्रम

पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, फारूक अब्दुल्ला ग्रेटर कैलाश में अपने एक परिचित के पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। जब वे समारोह के बाद वापस लौट रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने पीछे से आकर उन पर हमला करने का प्रयास किया। हमलावर ने अपनी पिस्तौल निकाली और अब्दुल्ला के सिर के पास तान दी। इससे पहले कि वह गोली चला पाता, सुरक्षाकर्मियों ने उसे पीछे की ओर खींच लिया और निहत्था कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने आरोपी की पिटाई भी की। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर आरोपी को अपनी कस्टडी में लिया और उसे स्थानीय थाने ले जाया गया। घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।

हमलावर कमल सिंह जामवाल की पहचान और पृष्ठभूमि

पुलिस ने हमलावर की पहचान 63 वर्षीय कमल सिंह जामवाल के रूप में की है। वह जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी है और प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पुरानी मंडी में ही एक दुकान चलाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कमल सिंह का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।

आरोपी के पास से जो पिस्तौल बरामद हुई है, वह लाइसेंसी बताई जा रही है और पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि एक सार्वजनिक समारोह में, जहां उच्च स्तरीय सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति मौजूद था, वहां कोई व्यक्ति हथियार लेकर कैसे प्रवेश कर गया। आरोपी के परिवार और उसके संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

20 साल से हमले की योजना बनाने का दावा

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी कमल सिंह जामवाल ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने जांच अधिकारियों को बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला पर हमले की योजना बना रहा था। उसने दावा किया कि वह लंबे समय से सही मौके की तलाश में था। बुधवार को उसे पता चला कि उसके चचेरे भाई के बेटे की शादी में फारूक अब्दुल्ला भी आमंत्रित हैं, जिसके बाद उसने इस हमले को अंजाम देने का फैसला किया।

पुलिस इस दावे की गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या यह किसी व्यक्तिगत रंजिश का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य की भी जांच की जा सकती है ताकि उसके बयानों की सत्यता की पुष्टि की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि 20 साल तक योजना बनाने की बात की गहनता से पुष्टि करना आवश्यक है।

सुरक्षा व्यवस्था और Z+ प्रोटोकॉल पर सवाल

फारूक अब्दुल्ला को देश की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक Z+ सुरक्षा प्राप्त है। इस सुरक्षा घेरे में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) या विशेष पुलिस इकाइयां शामिल होती हैं। इसके बावजूद एक सशस्त्र व्यक्ति का उनके इतने करीब पहुंच जाना सुरक्षा प्रोटोकॉल में एक बड़ी चूक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात का विश्लेषण कर रही हैं कि प्रवेश द्वार पर चेकिंग के दौरान चूक कहां हुई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। यह जांच की जा रही है कि क्या शादी समारोह के आयोजकों द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था और क्या वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने अपनी ड्यूटी में किसी प्रकार की लापरवाही बरती। आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किए जाने की संभावना है।

फारूक अब्दुल्ला का राजनीतिक कद और इतिहास

डॉ फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर की राजनीति के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं। वे तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में श्रीनगर लोकसभा सीट से पूर्व सांसद और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं। उनके पिता शेख अब्दुल्ला भी राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और वर्तमान में उनके बेटे उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं।

अब्दुल्ला परिवार दशकों से जम्मू-कश्मीर की राजनीति के केंद्र में रहा है। फारूक अब्दुल्ला पर पहले भी कई बार सुरक्षा संबंधी खतरे रहे हैं, जिसके कारण उन्हें उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की गई है। इस ताजा घटना ने केंद्र शासित प्रदेश में वीवीआईपी सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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