PoK हिंसा पर फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का फूटा गुस्सा, केंद्र की चुप्पी पर उठाए सवाल

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PoK हिंसा पर फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का फूटा गुस्सा, केंद्र की चुप्पी पर उठाए सवाल
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जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा बल के इस्तेमाल और वहां हो रही नागरिकों की हत्याओं पर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती सहित घाटी के विभिन्न राजनीतिक दलों और अन्य नेताओं ने PoK के मौजूदा हालात की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन नेताओं का स्पष्ट मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ इस तरह की हिंसक कार्रवाई किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

केंद्र सरकार की चुप्पी पर फारूक अब्दुल्ला के सवाल

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को PoK में आम नागरिकों की हत्या के मामले में केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर सरकार की कथित चुप्पी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सीमा पार हो रही बेगुनाह लोगों की मौत पर चुप रहना ठीक नहीं है। अब्दुल्ला ने मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द बात की जानी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिंता दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन हो रहा हो, तो उस पर चुप्पी साधना चिंताजनक है।

महबूबा मुफ्ती ने जताई गहरी संवेदना और की शांति की अपील

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने PoK के हालात पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं। मुफ्ती ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही बेरहमी की निंदा करते हुए कहा कि यह देखना अत्यंत दुखद है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार को सलाह दी कि उसे अपने नागरिकों के प्रति अधिक मानवीय रवैया अपनाना चाहिए। महबूबा मुफ्ती के अनुसार, बल प्रयोग के बजाय बातचीत का रास्ता चुनना ही किसी भी समस्या का सही समाधान हो सकता है।

पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में 30 लोगों की मौत

PoK से मिल रही खबरों के अनुसार, वहां चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है। इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं को झकझोर कर रख दिया है और राजनीतिक दलों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल करना लोकतंत्र और मानवता के खिलाफ है। इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है और मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बेगुनाह नागरिकों की सुरक्षा पर दिया जोर

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रहे बल प्रयोग को अत्यंत चिंताजनक बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाने का सिलसिला अब बंद होना चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि इस अशांत इलाके में जल्द ही शांति की बहाली होगी और लोगों को हिंसा से मुक्ति मिलेगी और उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण चर्चा में निहित है।

न्याय और सम्मान के हकदार हैं नागरिक

जम्मू-कश्मीर की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने एक सुर में कहा है कि PoK के लोग भी सम्मान, न्याय और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के हकदार हैं। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि वह दमनकारी नीतियों के जरिए जनता की आवाज को दबाना बंद करे और नेताओं ने जोर दिया कि पाकिस्तान को अपने नागरिकों की जायज शिकायतों और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन पर गोलियां चलानी चाहिए। सभी नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

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