'मैं शहीद होना चाहता था', फ्लाईदुबई को-पायलट का गाजा हमले पर बड़ा खुलासा

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'मैं शहीद होना चाहता था', फ्लाईदुबई को-पायलट का गाजा हमले पर बड़ा खुलासा
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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कैप्टन पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट ने जांचकर्ताओं के सामने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है और को-पायलट हमम अल-हम्मामी ने स्वीकार किया है कि उसने यह हिंसक कदम गाजा में जारी संघर्ष का बदला लेने के लिए उठाया था। इजराइली ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल माको की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल-हम्मामी ने अमीराती जांचकर्ताओं को बताया कि उसका उद्देश्य शहीद होना था। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर कहा कि मैंने यह गाजा का बदला लेने के लिए किया और मैं शहीद होकर मरना चाहता था। इस खुलासे ने विमान सुरक्षा और पायलटों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गाजा का बदला और शहादत की मंशा

ओमान के रहने वाले पायलट हमम अल-हम्मामी ने जांच के दौरान स्पष्ट किया कि उसके हमले के पीछे मुख्य कारण गाजा की स्थिति थी। उसने बताया कि वह इस हमले के जरिए बदला लेना चाहता था और खुद को शहीद के रूप में देखना चाहता था। इस कबूलनामे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब उसके पूरे बैकग्राउंड की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारी उसके मोबाइल फोन के डेटा, उसकी पिछली विदेश यात्राओं और उसके संपर्कों के जाल को खंगाल रहे हैं। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि क्या उसने इस पूरी साजिश को अकेले अंजाम दिया था या वह किसी बाहरी संगठन या व्यक्तियों के संपर्क में था जिन्होंने उसे इस कृत्य के लिए उकसाया था।

फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 की खौफनाक घटना

यह पूरी घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 में हुई थी। इस विमान में 170 से ज्यादा यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश इजराइली नागरिक थे। जब फ्लाइट अपनी मंजिल पर लैंड करने से एक घंटे से भी कम समय की दूरी पर थी, तब अचानक अल-हम्मामी ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। कॉकपिट के अंदर हुई इस हाथापाई का असर विमान के नियंत्रण पर पड़ा। फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से यह जानकारी सामने आई कि हमले के दौरान विमान कुछ ही सेकंड के भीतर 17000 फीट से ज्यादा नीचे गिर गया था। विमान की इस अचानक गिरावट से यात्रियों में हड़कंप मच गया था और एक बड़े हादसे का खतरा पैदा हो गया था।

कैप्टन और यात्रियों की बहादुरी से टला हादसा

हमले के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने हार नहीं मानी और को-पायलट का डटकर मुकाबला किया और संघर्ष के दौरान कैप्टन मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को अंदर चल रही हिंसक झड़प का पता चल गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यात्रियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और अल-हम्मामी को काबू करने में मदद की। सौभाग्य से उस फ्लाइट में कुछ ऑफ-ड्यूटी पायलट भी यात्री के रूप में मौजूद थे। उन्होंने तुरंत विमान का कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया और विमान को सुरक्षित स्थिति में वापस लाए। इस तरह कैप्टन, यात्रियों और ऑफ-ड्यूटी पायलटों की सूझबूझ से एक भयानक विमान दुर्घटना को टाल दिया गया।

कट्टरपंथी विचारधारा और पिछला रिकॉर्ड

हमम अल-हम्मामी का यह कबूलनामा उन खबरों के बीच आया है जिनमें उसकी चरमपंथी सोच का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल-हम्मामी को पिछले साल ओमान की नेशनल एयरलाइन से उसकी कट्टरपंथी विचारधारा के कारण ही नौकरी से निकाल दिया गया था। सीएनएन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि उसके नाम वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इजराइली विमानों के कॉकपिट वीडियो और अल-कायदा से जुड़े वीडियो पोस्ट किए गए थे और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि माना जा रहा है कि को-पायलट इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा से गहराई से प्रभावित था।

जुलाई में भी बनाया था हमले का प्लान

जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि अल-हम्मामी ने इस हमले की योजना पहले भी बनाई थी। इजराइली मीडिया के अनुसार, उसने जुलाई के महीने में भी इसी तरह का हमला करने के बारे में सोचा था। हालांकि, आखिरी समय में उसने अपना इरादा बदल दिया था। इसका कारण यह बताया गया कि उस समय फ्लाइट क्रू में उसका एक दोस्त शामिल था, जिसकी वजह से उसने अपने प्लान को टाल दिया था। लेकिन 30 सितंबर को उसने अपने इरादे को अंजाम देने की कोशिश की, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।

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