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: कोलकाता के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार, सोना पप्पू केस में बड़ी कार्रवाई

- कोलकाता के पूर्व DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार, सोना पप्पू केस में बड़ी कार्रवाई
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कोलकाता पुलिस के पूर्व पुलिस उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास को कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया है। शांतनु सिन्हा बिस्वास की यह गिरफ्तारी उनके खिलाफ जारी किए गए एक 'लुक आउट' नोटिस के बाद अमल में लाई गई है। पूर्व डीसीपी पर आरोप है कि उन्होंने एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य करने के बजाय एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता की तरह अपनी भूमिका निभाई और इसके अतिरिक्त, उन पर कई बड़े घोटालों में संलिप्त होने के भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।

लुक आउट नोटिस और ईडी की सख्त कार्रवाई

शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ करीब एक हफ्ते पहले ही लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 'सोना पप्पू' केस से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान जारी किया गया था और जांच एजेंसियों को इस बात की प्रबल आशंका थी कि शांतनु सिन्हा बिस्वास कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए देश छोड़कर भाग सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ही ईडी की टीमों ने शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास और उनके अन्य कई ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए गए थे।

राजनीतिक संबंध और पद के दुरुपयोग के आरोप

शांतनु सिन्हा बिस्वास को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी विश्वासपात्र माना जाता है। उनकी राजनीतिक निकटता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में उन्हें ममता सरकार द्वारा आयोजित एक धरने के दौरान मंच पर भी देखा गया था। उन पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर एक निष्पक्ष अधिकारी के बजाय सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया।

क्या है सोनू पप्पू मामला और गैंगवार का इतिहास?

शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी का मुख्य आधार 'सोनू पप्पू' से जुड़ा मामला है। इस मामले की जड़ें इसी साल फरवरी में कोलकाता के गोलपार्क इलाके में हुई एक भयंकर गैंगवार से जुड़ी हैं। उस दौरान दो गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में जमकर बमबाजी, गोलीबारी और पथराव हुआ था, जिससे पूरा इलाका दहल गया था। पुलिस ने इस हिंसक घटना के संबंध में अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। स्थानीय लोगों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा विवाद इलाके में अपना दबदबा कायम करने को लेकर था और सोनू पप्पू इस क्षेत्र पर अपना एकछत्र राज स्थापित करना चाहता था और इसी उद्देश्य से उसने इस हमले की पूरी योजना तैयार की थी।

सोनू पप्पू का आपराधिक सफरनामा

सोनू पप्पू का अपराध की दुनिया से पुराना नाता रहा है और उसने साल 2010-11 के दौरान कंस्ट्रक्शन (निर्माण) के व्यवसाय में कदम रखा था, लेकिन जल्द ही वह आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया। साल 2015 में उसने बालीगंज रेल यार्ड पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया था, जिसके कारण उसकी दुश्मनी एक अन्य कुख्यात अपराधी मुन्ना पांडे से हो गई थी। इसके बाद साल 2017 में स्विन्हो लेन इलाके पर कब्जे को लेकर हुई लड़ाई में पलाश जाना नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस मर्डर केस में पुलिस ने पप्पू को जलपाईगुड़ी से गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई थी। अब इसी अपराधी से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संरक्षण के मामले में पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

फिलहाल, शांतनु सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां उनसे गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि इस पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल अन्य बड़े नामों का खुलासा किया जा सके। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि एक पूर्व उच्चाधिकारी का नाम इतने बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है।

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