गणेश चतुर्थी 2026: जयपुर के मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब, गूंजे गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे

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गणेश चतुर्थी 2026: जयपुर के मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब, गूंजे गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे
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छोटी काशी के रूप में विख्यात जयपुर शहर में बुधवार सुबह से ही गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे गूंजने लगे। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर शहर के सभी प्रमुख गणेश मंदिरों में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से शुरू हुआ दर्शनों का यह सिलसिला देर शाम तक अनवरत जारी रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणपति के दर्शन मात्र से ही भक्तों को बुद्धि, बल, विवेक और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इस विशेष दिन पर राजधानी जयपुर के निवासियों ने अपने घरों के मुख्य द्वारों पर भी भगवान गणेशजी की प्रतिमाएं स्थापित कीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। भगवान को सिंदूर का चोला चढ़ाया गया और उन्हें जनेऊ व नवीन पोशाक धारण करवाई गई।

प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन

राजधानी के मोती डूंगरी गणेश मंदिर, नहर के गणेश मंदिर, गढ़ गणेश मंदिर और सिद्धि विनायक गणेश मंदिर सहित सभी छोटे-बड़े मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया गया। भगवान श्री गणेश का अभिषेक कर उन्हें नवीन और भव्य पोशाक धारण करवाई गई। भक्तों ने भगवान को मोदक, गुड़धानी और चूरमे का भोग लगाकर मंगल कामनाएं कीं।

नहर के गणेश मंदिर का शाही स्वरूप

नहर के गणेश मंदिर में उत्सव का नजारा बेहद खास था और यह मंदिर काफी प्राचीन है और यहाँ भगवान श्री गणेश दक्षिणावर्ती सूंड और दक्षिणाभिमुख स्वरूप में विराजमान हैं। इस अवसर पर प्रथम पूज्य को राजशाही पोशाक पहनाई गई। स्वर्ण मुकुट और स्वर्ण कर्ण अलंकारों से सजे गणपति के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। माउंट रोड पर मंदिर में प्रवेश के लिए प्रशासन द्वारा बैरिकेड्स लगाए गए थे। मंदिर के महंत जय शर्मा ने बताया कि भगवान का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। मुख्य कार्यक्रम से पहले यहाँ भस्म से तैयार विग्रह का दूर्वा अभिषेक किया गया। उन्होंने बताया कि भगवान के पूरे वर्ष राजसी रूप के दर्शन होते हैं। इससे एक दिन पहले सिंजारा महोत्सव मनाया गया था, जिसमें मेहंदी का वितरण हुआ और भगवान को लहरिया की पोशाक पहनाई गई थी। गणेश चतुर्थी पर उन्हें राजशाही पोशाक और स्वर्ण मुकुट धारण करवाया गया, साथ ही 56 भोग की झांकी सजाई गई। शाम को आतिशबाजी और बैंड वादन ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी।

प्राचीन गढ़ गणेश मंदिर की परंपरा

नाहरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित गढ़ गणेश मंदिर का इतिहास जयपुर की बसावट से भी पुराना है। इस मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ की विशेषता यह है कि यहाँ बिना सूंड वाले गणेशजी विराजमान हैं। मंदिर में विशेष चूरमा प्रसाद का वितरण किया गया। इसे जयपुर का सबसे पहला गणेश धाम माना जाता है और मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने के बाद ही अन्य गणेश मंदिरों में जाना चाहिए।

मोती डूंगरी में उमड़ी भारी भीड़

जयपुर का सबसे प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना रहा और यहाँ सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जो जेएलएन मार्ग तक पहुँच गई थीं। गणपति बप्पा को हीरे जड़ित स्वर्ण मुकुट, नौलखा हार और चांदी के सिंहासन पर विराजमान कराया गया। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया और मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी।

डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने की पूजा

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर प्रदेश की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुँचकर भगवान के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान गणेशजी का आशीर्वाद लिया। दीया कुमारी ने गजानन से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। उन्होंने प्रदेश की उन्नति और विकास की मनोकामना करते हुए कहा कि भगवान श्री गणेश जी की कृपा से राजस्थान प्रकृति, विकास और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़े।

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