वैश्विक कूटनीति में हलचल: रूस पहुंचे सीआईए चीफ तो चीन में डोभाल, भारत की चौतरफा रणनीतिक सक्रियता

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वैश्विक कूटनीति में हलचल: रूस पहुंचे सीआईए चीफ तो चीन में डोभाल, भारत की चौतरफा रणनीतिक सक्रियता
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दुनिया भर की राजनीति में इस समय एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखी जा रही है। कई शक्तिशाली देशों के शीर्ष अधिकारी और नेता एक साथ विदेशी दौरों पर हैं, जो वैश्विक समीकरणों के बदलने का संकेत दे रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस जयशंकर और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ जैसे बड़े नाम इस समय अंतरराष्ट्रीय मिशनों पर हैं। इन यात्राओं के पीछे रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत-चीन सीमा विवाद और वैश्विक निवेश जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। भारत इस समय रूस, चीन, जापान, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से साधने की कोशिश कर रहा है।

सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ का अचानक मॉस्को दौरा

सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ 25 अगस्त को अचानक मॉस्को पहुंचे, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सीआईए प्रमुख बनने के बाद यह उनका रूस का पहला दौरा है और साल 2021 में विलियम बर्न्स की यात्रा के बाद यह किसी अमेरिकी खुफिया प्रमुख की रूस की दुर्लभ यात्रा मानी जा रही है। सीआईए और क्रेमलिन दोनों ने ही इस बैठक के विवरण को गुप्त रखा है और कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, रैटक्लिफ ने रूसी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मुलाकातें की हैं, हालांकि बातचीत के मुख्य बिंदुओं की पुष्टि नहीं हुई है।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन युद्ध अपने चरम पर है और अमेरिका व रूस के बीच संपर्क के रास्ते तलाशने की कोशिशें की जा रही हैं और द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने यूक्रेन से सोमवार से बुधवार तक मॉस्को पर किसी भी प्रकार के हमले को रोकने का अनुरोध किया था ताकि यह दौरा सुचारू रूप से हो सके। इस यात्रा में ईरान का मुद्दा भी काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि मॉस्को और तेहरान के बढ़ते संबंध अमेरिका के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

बीजिंग में अजीत डोभाल: सीमा विवाद पर 25वें दौर की वार्ता

इसी दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 25 अगस्त को बीजिंग में मौजूद थे। उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में हिस्सा लिया। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाना था। डोभाल की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सितंबर में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है। अपनी यात्रा के दौरान डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की, जो दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ने का संकेत है।

रूस में एस जयशंकर: व्यापार और रणनीतिक संबंधों पर जोर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 23 और 24 अगस्त को रूस के दौरे पर रहे। उन्होंने वहां भारत-रूस इंटर-गवर्नमेंटल कमीशन की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था। रूस के साथ भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंध काफी पुराने और मजबूत हैं। जयशंकर का यह दौरा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की तटस्थ और मजबूत विदेश नीति को दर्शाता है, विशेषकर तब जब रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है।

जापान में पीयूष गोयल: 200 सदस्यों का विशाल व्यापारिक दल

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं। वह अपने साथ करीब 200 सदस्यों वाले एक विशाल भारतीय कारोबारी डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे हैं। इसे जापान के लिए भारत का अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन कहा जा रहा है। इस दौरे में वे टोक्यो, नागोया और ओसाका जैसे प्रमुख शहरों का दौरा कर रहे हैं। उनका मुख्य फोकस भारत-जापान के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है, विशेषकर हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई और अगली पीढ़ी के उद्योगों में सहयोग बढ़ाना। भारत को उम्मीद है कि इस दौरे से जापानी कंपनियां भारत में अपना निवेश बढ़ाएंगी।

निर्मला सीतारमण का कनाडा और अमेरिका दौरा: निवेश का एजेंडा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। कनाडा में वह भारत-कनाडा के पहले इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग में भाग लेंगी, जहां ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, एआई और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी और इसके बाद वह अमेरिका के शिकागो, एशविल और न्यूयॉर्क जाएंगी। एशविल में 31 अगस्त और 1 सितंबर को वह जी20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। न्यूयॉर्क में उनका कार्यक्रम निवेशकों से मिलने और नैस्डैक के बेल-रिंगिंग समारोह में शामिल होने का है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।

मोहन भागवत और मरियम नवाज के विदेशी दौरे

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। यह यात्रा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को उनका एक बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें 5000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ भी 25 अगस्त को चार दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचीं। उन्होंने शिनजियांग के उरुमकी से अपने दौरे की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य कृषि और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।

इन दौरों के पीछे के बड़े संकेत

इन सभी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं का विश्लेषण करने पर तीन प्रमुख प्रवृत्तियां उभर कर सामने आती हैं। पहला, अमेरिका और रूस के बीच पर्दे के पीछे से बातचीत और संपर्क बढ़ रहा है। दूसरा, भारत एक साथ रूस, चीन, जापान, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों के साथ अलग-अलग मोर्चों पर सक्रियता से बातचीत कर रहा है। तीसरा, दक्षिण एशिया के देश चीन के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में जुटे हैं। यह स्पष्ट है कि भारत की विदेश नीति इस समय किसी एक गुट की ओर झुकने के बजाय अपनी जरूरतों के हिसाब से सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाने की है।

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