कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट: ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला, तेल हुआ सस्ता

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट: ट्रंप ने टाला ईरान पर हमला, तेल हुआ सस्ता
विज्ञापन

वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अगस्त का महीना बड़ी राहत लेकर आया है। जुलाई के महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली थी, लेकिन अगस्त के पहले ही कारोबारी दिन इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। खाड़ी देशों के कच्चे तेल और अमेरिकी क्रूड की कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। पिछले महीने दुनिया भर के विशेषज्ञ इस बात की आशंका जता रहे थे कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। हालांकि, कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जरूर गईं, लेकिन वहां टिक नहीं सकीं और अब फिर से 95 से 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई बड़ी गिरावट

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 4 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट देखी गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 डॉलर 8 पैसे यानी 4 डॉलर 64 पैसे फीसदी गिरकर 83 डॉलर 85 पैसे प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4 डॉलर 1 पैसा यानी 4 डॉलर 74 पैसे फीसदी की गिरावट के साथ 80 डॉलर 66 पैसे प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। यह गिरावट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले महीने ओमान के पास टैंकरों पर हुए हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण शिपर्स खाड़ी में जाने से डर रहे थे, जिससे कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया था।

ट्रंप की कूटनीति और ईरान के साथ डील की उम्मीद

तेल की कीमतों में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बदला हुआ रुख माना जा रहा है। ट्रंप ने ईरान पर नया हमला करने के बजाय बातचीत और समझौते का रास्ता चुनने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी दी कि ईरान और मध्य पूर्व के अन्य देशों ने एक समझौते को पूरा करने के लिए समय मांगा है और इस संभावित डील का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना है। इस खबर के सामने आते ही बाजार में युद्ध का डर कम हुआ और कीमतों में गिरावट शुरू हो गई।

बाजार विशेषज्ञों की राय और शिपिंग की स्थिति

आईजी मार्केट के एनालिस्ट टोनी सिकामोर का मानना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह हफ्ता भी पिछले हफ्ते की तरह ही रहेगा। अगर ईरान अपनी बात पर अड़ा रहता है और स्ट्रेट पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल करके अमेरिकी ठिकानों या टैंकरों पर हमला करता है, तो समझौते की उम्मीदें फिर से खत्म हो सकती हैं। इस बीच, सऊदी अरब के तेल से लदे दो टैंकर लाल सागर से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। हालांकि, सोमवार के शिपिंग डेटा से पता चला है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही अभी भी धीमी है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने शनिवार से अब तक टैंकरों पर तीन और हमलों की सूचना दी है, जो बाजार में अभी भी बनी हुई अनिश्चितता को दर्शाता है।

ओपेक प्लस ने उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी

सप्लाई के मोर्चे पर भी सकारात्मक खबर आई है। रविवार को ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने सितंबर से तेल उत्पादन को लगभग 188,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। प्रोड्यूसर ग्रुप का कहना है कि यह कदम पहले की गई स्वैच्छिक कटौती को धीरे-धीरे वापस लेने की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इस साल ईरान और यूक्रेन युद्ध के कारण खाड़ी, रूस और कजाकिस्तान से होने वाले निर्यात में रुकावट आई थी, जिससे ओपेक प्लस की पिछली बढ़ोतरी का बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था, लेकिन वर्तमान स्थिति में इसे कीमतों को नियंत्रित करने वाला कदम माना जा रहा है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें

वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले 70 दिनों से स्थिर हैं। आखिरी बार 25 मई को तेल कंपनियों ने कीमतों में बदलाव किया था, जब पेट्रोल 2 रुपये 61 पैसे और डीजल 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ था। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अभी भी 102 रुपये 12 पैसे प्रति लीटर और डीजल 95 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर पर बनी हुई है। मुंबई में पेट्रोल 111 रुपये 21 पैसे और डीजल 97 रुपये 83 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में भी पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार है। हैदराबाद में डीजल 103 रुपये 82 पैसे और चेन्नई में 100 रुपये 92 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है।

विज्ञापन