भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले एक महीने के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया है और मार्च की शुरुआत में जहां कीमती धातुएं अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, वहीं अब इनमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम लगभग ₹12,000 की कमी आई है, जबकि चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम ₹35,000 तक की गिरावट देखी गई है। इस सुधार ने घरेलू बाजार में खरीदारी के परिदृश्य को बदल दिया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कीमतों का विवरण
62 lakh प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। 50 lakh के करीब पहुंच गया है। इसी तरह, चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 35 lakh के स्तर पर आ गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक और घरेलू कारकों के संयोजन का परिणाम है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता
बाजार के जानकारों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में इस गिरावट का एक मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बनी अनिश्चितता है। इन वैश्विक परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी गई। जब भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बाद बाजार में आई स्थिरता ने कीमतों को नीचे लाने में मदद की है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बनाया है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतें गिरती हैं। इसके अतिरिक्त, मार्च के शुरुआती हफ्तों में आई रिकॉर्ड तेजी के बाद, कई बड़े निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी। इस बिकवाली के दबाव के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में तेज सुधार देखने को मिला है।
घरेलू मांग और आगामी वैवाहिक सीजन
भारत में सोने और चांदी की कीमतों में आई इस कमी का सीधा असर घरेलू मांग पर पड़ने की संभावना है और सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, कीमतों में गिरावट आने से उन ग्राहकों को राहत मिली है जो आगामी वैवाहिक सीजन के लिए आभूषणों की खरीदारी की योजना बना रहे थे। बाजार में आई इस नरमी से खुदरा स्तर पर मांग में वृद्धि देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में स्थिरता आने से बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है, जो पिछले कुछ समय से उच्च कीमतों के कारण रुकी हुई थी।
बाजार की संवेदनशीलता और वर्तमान स्थिति
वर्तमान में सर्राफा बाजार वैश्विक संकेतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है और विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। हालांकि कीमतों में ₹12,000 और ₹35,000 की यह गिरावट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन बाजार अभी भी पूरी तरह से स्थिर नहीं हुआ है। केंद्रीय बैंकों की नीतियों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों का प्रभाव आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।