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निफ्टी में चार महीने की गिरावट थमी, ऐतिहासिक डेटा से रिकवरी के संकेत

निफ्टी में चार महीने की गिरावट थमी, ऐतिहासिक डेटा से रिकवरी के संकेत
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निफ्टी 50 इंडेक्स ने पिछले चार महीनों से जारी गिरावट के सिलसिले को मार्च 2026 में समाप्त कर दिया है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, सूचकांक के इतिहास में यह केवल सातवीं बार है जब लगातार चार महीनों तक गिरावट दर्ज की गई है। ऐतिहासिक रुझानों के आधार पर, ऐसी लंबी अवधि की गिरावट के बाद बाजार में अक्सर मजबूत वापसी देखी गई है। 7% रहा है। सूचकांक के 105 नकारात्मक गिरावट के मामलों में से अधिकांश केवल एक महीने तक सीमित रहे हैं, जिससे वर्तमान स्थिति को दुर्लभ माना जा रहा है।

ऐतिहासिक रिटर्न और बाजार का पिछला प्रदर्शन

डीएसपी म्यूचुअल फंड के डेटा से एक स्पष्ट पैटर्न का पता चलता है कि गिरावट की अवधि जितनी लंबी होती है, उसके बाद की रिकवरी उतनी ही मजबूत होने की संभावना रहती है और 7% तक पहुंच गया है। 9% की वृद्धि दर्ज की गई थी। 6% का लाभ देखा गया था। 8% का वार्षिक रिटर्न प्राप्त हुआ था।

संस्थागत निवेशकों की इक्विटी आवंटन रणनीति

8% की गिरावट देखी गई थी। इस स्थिति के बीच बड़े संस्थागत निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी में बदलाव किया है। 9% कर दिया है। यह पिछले लगभग पांच वर्षों में फंड का उच्चतम स्तर है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के कार्यकारी निदेशक और सीआईओ एस. नरेन के अनुसार, वर्तमान वैल्यूएशन और बाजार की धारणा से जुड़े संकेत अब बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं। 7% का उच्चतम इक्विटी निवेश किया था, जिसके बाद बाजार में बड़ी तेजी देखी गई थी।

बाजार में कैपिटुलेशन और रिकवरी के संकेत

क्वांट म्यूचुअल फंड ने अपने ताजा नोट में उल्लेख किया है कि भारतीय इक्विटी बाजार में 'कैपिटुलेशन' के संकेत मिल रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि बिकवाली का सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट सकता है। फंड के अनुसार, बाजार चक्र के सबसे निचले स्तर पर अस्थिरता बढ़ जाती है और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है। क्वांट म्यूचुअल फंड का तर्क है कि भारत की नॉमिनल जीडीपी चीन की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रही है, जिससे भारतीय इक्विटी वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण विकल्प बनी हुई है। फंड ने यह भी संकेत दिया है कि सितंबर तिमाही में कॉर्पोरेट अर्निंग्स का चक्र अपने निचले स्तर पर पहुंच गया था और अब इसमें धीरे-धीरे सुधार की संभावना है।

गिरावट की अवधि और सूचकांक का इतिहास

निफ्टी के ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लंबी अवधि की गिरावट अत्यंत दुर्लभ है। सूचकांक के इतिहास में दर्ज 105 गिरावट के मामलों में से आधे से अधिक केवल एक महीने तक चले। केवल सात बार ऐसा हुआ है जब गिरावट चार महीने या उससे अधिक समय तक खिंची हो। निफ्टी के इतिहास की सबसे लंबी गिरावट सितंबर 1994 से अप्रैल 1995 तक दर्ज की गई थी, जो आठ महीने तक चली थी। डेटा यह भी दर्शाता है कि सभी रिकवरी तत्काल नहीं होती हैं। 6% हो गई थी।

वैश्विक व्यापार और कॉर्पोरेट अर्निंग्स का प्रभाव

बाजार की भविष्य की दिशा में वैश्विक कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है और क्वांट म्यूचुअल फंड के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौतों का दीर्घकालिक लाभ बाजार को मिल सकता है। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद, नियामक संस्थाओं और आरबीआई की कार्रवाई से बाजार को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। फंड ने अपने पोर्टफोलियो में भी बदलाव किया है, जिसमें लार्ज कैप शेयरों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही, चुनिंदा मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भी निवेश बढ़ाया गया है। कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुधार और घरेलू आर्थिक संकेतकों की मजबूती बाजार की अगली तेजी के लिए मुख्य कारक माने जा रहे हैं।

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