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सोने-चांदी की कीमतों में तेजी: भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक आंकड़ों का असर

सोने-चांदी की कीमतों में तेजी: भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक आंकड़ों का असर
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आर्थिक आंकड़ों ने कीमती धातुओं के बाजार में हलचल तेज कर दी है। पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में सकारात्मक रुख देखा गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की वर्तमान स्थिति मुख्य रूप से ईरान-अमेरिका संबंधों और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं से प्रभावित है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक निवेशक अब अमेरिका के आगामी आर्थिक संकेतकों जैसे बेरोजगारी दर और जॉबलेस क्लेम्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो भविष्य की मौद्रिक नीतियों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर कीमतों का प्रदर्शन

पिछले सप्ताह भारतीय कमोडिटी बाजार में छुट्टियों के कारण कारोबारी सत्र कम रहे, लेकिन इसके बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और 65% की साप्ताहिक बढ़त है। इसी प्रकार, मई डिलीवरी वाली चांदी की कीमतों में ₹4,541 प्रति किलोग्राम का उछाल देखा गया, जो 2% की वृद्धि दर्शाता है। चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार तीन हफ्तों की गिरावट के बाद बाजार में यह रिकवरी देखी गई है। इस तेजी के पीछे भारतीय रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में आई कमजोरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिससे निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश के रूप में बुलियन की ओर बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतक

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में तेजी का माहौल बना रहा। 43% की साप्ताहिक वृद्धि है। 92 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, सोने की कीमतों ने लगातार दूसरे सप्ताह मजबूती के साथ समापन किया है। बाजार अब अमेरिका के सर्विसेज PMI, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) इंडेक्स और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जैसे महत्वपूर्ण आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहा है और ये आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से संबंधित भविष्य के निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ईरान द्वारा अमेरिका के शांति प्रस्तावों को कथित तौर पर खारिज करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण बनाए रखने के रुख ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने की किसी भी खबर का सीधा और तत्काल असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से संबंधित बयानों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।

चीन में चांदी की मांग और वैश्विक आपूर्ति

चांदी की कीमतों में आई तेजी के पीछे औद्योगिक मांग का भी बड़ा हाथ है। 76 मीट्रिक टन चांदी का आयात किया है। यह आयात स्तर पिछले आठ वर्षों में सबसे अधिक दर्ज किया गया है और चीन में चांदी की इस बढ़ती मांग ने वैश्विक आपूर्ति पर दबाव डाला है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी भौतिक मांग मजबूत बनी हुई है, जो कीमतों में गिरावट को रोकने का काम कर रही है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति और घरेलू कारक

भारतीय निवेशकों की नजर इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी है। घरेलू स्तर पर ब्याज दरों और मुद्रास्फीति को लेकर आरबीआई का रुख बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है और विश्लेषकों के अनुसार, यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई कड़ा रुख अपनाता है, तो इसका असर रुपये की तरलता और कीमती धातुओं की मांग पर पड़ सकता है। वर्तमान में, मजबूत भौतिक मांग और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में रहकर मजबूती दिखाने की संभावना रखती हैं। बाजार सहभागियों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की निरंतर खरीद और ईटीएफ प्रवाह में बदलाव भी कीमतों की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक होंगे।

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