राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा शनिवार को झुंझुनूं के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से औपचारिक बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चल रही कथित खींचतान और राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। डोटासरा ने विशेष रूप से पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का उल्लेख करते हुए भाजपा की आंतरिक नियुक्तियों पर कटाक्ष किया। उन्होंने राज्य की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।
राजनीतिक नियुक्तियों और राजेंद्र राठौड़ पर कटाक्ष
मीडिया से बातचीत के दौरान गोविंद सिंह डोटासरा ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम लेते हुए कहा कि भाजपा के कई बड़े नेता वर्तमान में अपनी राजनीतिक नियुक्ति की 'पर्ची' का इंतजार कर रहे हैं। डोटासरा के अनुसार, भाजपा सरकार अपने कार्यकर्ताओं को नियुक्तियां देने में विफल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार ढाई साल बीतने के बाद भी अपने संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं को उचित स्थान नहीं दे पाई है, वह प्रदेश के विकास और जनहित के कार्यों को कैसे गति देगी।
प्रशासनिक विफलता और विधायकों की स्थिति
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल को विफल बताते हुए दावा किया कि सत्ताधारी दल के विधायकों की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के जीते हुए विधायक एक शिक्षक या चपरासी तक का स्थानांतरण करवाने में सक्षम नहीं हैं। डोटासरा के अनुसार, सरकार स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से इसलिए बच रही है क्योंकि उसे जनता के बीच अपनी वास्तविक स्थिति उजागर होने का भय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर सरकार का नियंत्रण कमजोर हुआ है।
यमुना जल समझौते और डीपीआर पर सवाल
शेखावाटी क्षेत्र के महत्वपूर्ण यमुना जल मुद्दे पर डोटासरा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस विषय पर केवल प्रचार और होर्डिंग का सहारा लिया है। उन्होंने बताया कि सवा दो साल का समय बीत जाने के बावजूद अब तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार नहीं की गई है। डोटासरा ने एमओयू की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा द्वारा 2400 क्यूसेक पानी लेने के बाद, केवल मानसून के दौरान 'ओवर फ्लड' की स्थिति में ही राजस्थान को पानी मिल सकेगा। उन्होंने बजट में घोषित ₹3200 करोड़ की राशि को भी अपर्याप्त और भ्रामक बताया।
बजट आवंटन और क्षेत्रीय विकास में भेदभाव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य बजट में क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए सीकर और लक्ष्मणगढ़ के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री झाबर सिंह खर्रा के निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक सड़क और एक अस्पताल की स्वीकृति दी गई है। वहीं, लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा नेताओं द्वारा केवल डेढ़-डेढ़ किलोमीटर की दो सड़कों का प्रस्ताव लाया गया है। डोटासरा ने तर्क दिया कि जब मंत्रियों के क्षेत्रों में विकास कार्यों की यह स्थिति है, तो अन्य विधायकों और सामान्य क्षेत्रों में विकास की गति का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है।