भारत सरकार ने देश में ऊर्जा वितरण प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन भौगोलिक क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है, वहां के निवासियों को अनिवार्य रूप से इस सेवा को अपनाना होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में पीएनजी कनेक्टिविटी तकनीकी रूप से संभव है और उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो संबंधित पते पर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति तीन महीने के भीतर बंद कर दी जाएगी और यह आदेश 'नेचुरल गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं के निर्माण, संचालन और विस्तार के माध्यम से) आदेश, 2026' के तहत प्रभावी किया गया है।
इस कदम के पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर एलपीजी की आपूर्ति में आ रही बाधाएं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव हैं और भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और वैश्विक अस्थिरता के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा देना और एलपीजी सिलेंडर की निर्भरता को उन दूरदराज के क्षेत्रों तक सीमित करना है, जहां पाइपलाइन बिछाना वर्तमान में संभव नहीं है और तेल सचिव नीरज मित्तल के अनुसार, इस संकट को एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है ताकि देश के ऊर्जा ढांचे को अधिक आधुनिक और टिकाऊ बनाया जा सके।
अनिवार्य स्विच और एलपीजी आपूर्ति पर रोक
नए नियमों के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन सभी घरों के लिए पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य कर दिया है जहां बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है। आदेश में कहा गया है कि एक बार पीएनजी नेटवर्क चालू हो जाने के बाद, उपभोक्ताओं को स्विच करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि के भीतर उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) उस कनेक्शन पर एलपीजी सिलेंडर की रिफिलिंग और आपूर्ति रोक देंगी। यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि एक ही क्षेत्र में दो अलग-अलग प्रकार के रसोई ईंधन की समानांतर आपूर्ति के बोझ को कम किया जा सके और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग हो सके।
तकनीकी बाधा और एनओसी का प्रावधान
सरकार ने उन उपभोक्ताओं के लिए राहत का प्रावधान भी रखा है जहां भौगोलिक या संरचनात्मक कारणों से पीएनजी कनेक्शन देना संभव नहीं है और यदि कोई घर ऐसी स्थिति में है जहां पाइपलाइन बिछाना तकनीकी रूप से व्यवहार्य नहीं है, तो संबंधित गैस वितरण कंपनी को एक 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) जारी करना होगा। इस एनओसी के आधार पर, उपभोक्ता अपनी एलपीजी सेवा को पहले की तरह जारी रख सकेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी भी वास्तविक समस्या वाले घर को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केवल तकनीकी व्यवहार्यता वाले मामलों में ही एलपीजी कनेक्शन काटा जाएगा।
बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए सख्त समयसीमा
आदेश में केवल उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि गैस वितरण कंपनियों और सार्वजनिक प्राधिकरणों पर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं और पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, सार्वजनिक प्राधिकरणों को अब समयबद्ध तरीके से अनुमति देनी होगी। आवासीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के लिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जहां अधिकारियों को तीन कार्यदिवसों के भीतर मंजूरी देनी होगी। इसके अतिरिक्त, 'लास्ट माइल' पीएनजी कनेक्शन यानी घर के भीतर पाइपलाइन पहुंचाने का कार्य 48 घंटे के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। यदि कोई प्राधिकरण निर्धारित समय में अनुमति नहीं देता है, तो उसे 'डीम्ड अप्रूवल' यानी स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा।
नियामक शक्तियां और दंड के प्रावधान
पाइपलाइन बिछाने के कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अधिकारियों को नागरिक अदालत के समान शक्तियां प्रदान की गई हैं। यदि कोई व्यक्ति या संस्था पाइपलाइन बिछाने में अनावश्यक देरी करती है या अनुमति देने से इनकार करती है, तो सक्षम अधिकारी हस्तक्षेप कर सकेंगे। इसके अलावा, गैस वितरण कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अनुमोदन मिलने के चार महीने के भीतर पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दें और यदि कंपनियां इस समयसीमा का पालन करने में विफल रहती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और वे उस क्षेत्र में अपने विशेष वितरण अधिकार (Exclusivity Rights) भी खो सकती हैं।
पीएनजीआरबी की निगरानी और कार्यान्वयन
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) को इस पूरे आदेश के कार्यान्वयन और अनुपालन की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है और बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि गैस कंपनियां और स्थानीय प्रशासन नए नियमों का कड़ाई से पालन करें। पीएनजीआरबी को यह अधिकार दिया गया है कि वह समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारू हो। इस नीति का दीर्घकालिक उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयातित एलपीजी पर देश की निर्भरता को कम करना है।