ग्रेटर नोएडा में दो सीक्रेट ड्रग लैब का भंडाफोड़, अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक सफलता और विदेशी नागरिक गिरफ्तार

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ग्रेटर नोएडा में दो सीक्रेट ड्रग लैब का भंडाफोड़, अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक सफलता और विदेशी नागरिक गिरफ्तार
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उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला एक्शन सामने आया है, जहां दो गुप्त ड्रग लैब को पूरी तरह से सीज कर दिया गया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में दो गुप्त ड्रग लैब का भंडाफोड़ किए जाने को मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी अभियान में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके से भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स, ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रासायनिक पदार्थों और अत्याधुनिक उपकरणों को बड़े पैमाने पर जब्त किया गया है और अधिकारियों द्वारा दी गई शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस मामले में कुल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से एक आरोपी विदेशी नागरिक भी शामिल है, जिससे इस अवैध ड्रग नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होने के गहरे तार होने की आशंका जताई जा रही है।

ड्रग कार्टेल को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार की दो टूक

इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों द्वारा जुटाई गई पुख्ता और सटीक जानकारी के आधार पर की गई बेहद प्रभावी कार्रवाई का एक अत्यंत उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ इस बात को दोहराया कि देश की वर्तमान सरकार मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त और सक्रिय किसी भी ड्रग कार्टेल को जड़ से और पूरी तरह से खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार की यह नीति साफ करती है कि देश की युवा पीढ़ी को नशे की दलदल में धकेलने वाले आपराधिक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा लगातार कसता जाएगा।

दिसंबर 2029 है देश से नशे का कारोबार खत्म करने की डेडलाइन

गृह मंत्री अमित शाह ने आगे विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सशक्त और नशामुक्त भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार ने एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत सरकार का मुख्य और अंतिम लक्ष्य दिसंबर 2029 से पहले देश भर से ड्रग कार्टेल के पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद और ध्वस्त करना है। यह निर्धारित लक्ष्य नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के अनुरूप ही पूरी तरह से तय किया गया है, जिसे विशेष रूप से देश भर में मादक पदार्थों की तस्करी और उनके अवैध उत्पादन पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए अपनाया गया है।

नशीले पदार्थों के अवैध उत्पादन और तस्करी के खिलाफ अभियान तेज

वर्तमान समय में ग्रेटर नोएडा में हुई इस ताज़ा कार्रवाई को देश भर में नशीले पदार्थों के अवैध उत्पादन और उनकी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और सरकार का मुख्य जोर इस बात पर है कि खुफिया सूचनाओं के सटीक तंत्र का इस्तेमाल करके इस तरह के गुप्त नेटवर्क की तुरंत पहचान की जाए और उनके पूरे तंत्र को जड़ से नष्ट कर दिया जाए। मादक पदार्थों की तस्करी के इस नापाक खेल को रोकने के लिए खुफिया विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार समन्वय बनाकर काम कर रही हैं, जिसके परिणाम अब धरातल पर साफ दिखाई देने लगे हैं।

नशे के कारोबार के खिलाफ केंद्र और राज्यों को मिलकर करना होगा काम

इससे पहले भी इस गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए, बीते 23 सितंबर को एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स यानी एएनटीएफ के प्रमुखों के तीसरी नेशनल समिट का औपचारिक उद्घाटन करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अहम बयान दिया था। उस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि जब तक देश की केंद्र सरकार और तमाम राज्य सरकारों के सभी डिपार्टमेंट मिलकर साल 2029 तक नशा-मुक्त भारत के इस बड़े और राष्ट्रीय टारगेट को हासिल करने के लिए एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम नहीं करेंगे, तब तक हम इस दिशा में अपेक्षित और प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ सकते हैं। उनका यह साफ संदेश था कि नशा मुक्ति के इस महाअभियान में सहकारी संघवाद की भावना के तहत सभी को अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी ताकि देश को इस लाइलाज बीमारी जैसी समस्या से पूरी तरह से मुक्त कराया जा सके।

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