Greenland Dispute: ग्रीनलैंड विवाद- मेलोनी ने ट्रंप को दिया दो टूक संदेश, NATO के भीतर सुलझाने पर जोर
Greenland Dispute - ग्रीनलैंड विवाद- मेलोनी ने ट्रंप को दिया दो टूक संदेश, NATO के भीतर सुलझाने पर जोर
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ग्रीनलैंड के भविष्य और उसकी सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर संबोधित किया है। मेलोनी ने स्पष्ट किया है कि आर्कटिक क्षेत्र में ग्रीनलैंड से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं का समाधान उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के भीतर ही किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, खासकर ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की कथित इच्छा के बाद।
आर्कटिक सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं
मेलोनी ने अपनी जापान यात्रा के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि आर्कटिक क्षेत्र को लेकर अमेरिका द्वारा उठाई गई सुरक्षा संबंधी चिंताएं 'जायज' और 'गंभीर' हैं और हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन चिंताओं पर चर्चा और उनका समाधान NATO के सहयोगी देशों के बीच ही होना चाहिए। यह दृष्टिकोण सामूहिक सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देता है, बजाय इसके कि कोई एक देश एकतरफा निर्णय ले।NATO की सामूहिक जिम्मेदारी
इटली की प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा NATO के सभी सदस्य देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में सहयोगी देशों की उपस्थिति बढ़ाने पर विचार करना आवश्यक है ताकि इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। मेलोनी का मानना है कि NATO के भीतर होने वाली बहस को विभाजन के रूप में नहीं देखा जाना। चाहिए, बल्कि इसे साझा रणनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए एक आवश्यक प्रक्रिया के रूप में समझा जाना चाहिए। यह बयान NATO की एकता और उसके सदस्य देशों के बीच सहयोग की भावना को मजबूत करता है।जमीनी सैन्य दखल की संभावना कम
मेलोनी ने ग्रीनलैंड में किसी भी प्रकार के जमीनी सैन्य दखल की संभावना को काफी कम बताया और यह टिप्पणी संभवतः उन अटकलों को शांत करने के लिए थी जो इस क्षेत्र में संभावित सैन्यीकरण को लेकर चल रही थीं। उनका यह बयान दर्शाता है कि इटली और संभवतः अन्य NATO सदस्य देश भी इस मुद्दे का समाधान कूटनीतिक और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से करना चाहते हैं, न कि सैन्य बल के प्रयोग से। यह शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।NATO के भीतर समन्वय का प्रस्ताव
मेलोनी के अनुसार, NATO पहले ही आर्कटिक को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में मान्यता दे चुका है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि NATO के भीतर समन्वय बहुत महत्वपूर्ण है ताकि बिखरे हुए या एकतरफा फैसलों से बचा जा सके। इटली ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर NATO के मंच पर औपचारिक चर्चा का प्रस्ताव भी रखा है। इस संदर्भ में, उन्होंने NATO महासचिव मार्क रुटे द्वारा डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के साथ आयोजित बैठक का भी उल्लेख किया, जो इस बात का संकेत है कि इस मुद्दे पर पहले से ही उच्च-स्तरीय चर्चाएं चल रही हैं।ट्रंप का ग्रीनलैंड पर रुख और यूरोपीय देशों पर टैरिफ
मेलोनी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड। ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं। इस मुद्दे पर उनका विरोध करने वाले कई यूरोपीय देशों पर ट्रंप ने टैरिफ भी लगा दिए हैं। इन देशों में डेनमार्क, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं। ट्रंप का यह कदम यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा। कर सकता है, साथ ही ग्रीनलैंड के मुद्दे को और अधिक जटिल बना सकता है। मेलोनी का संदेश स्पष्ट है कि ऐसे मुद्दों को एकतरफा कार्रवाई के बजाय सामूहिक रूप से सुलझाया जाना चाहिए।