गुजरात सीआईडी ने 1071 करोड़ के साइबर घोटाले में मास्टरमाइंड रफीकुल आलम को किया गिरफ्तार

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गुजरात सीआईडी ने 1071 करोड़ के साइबर घोटाले में मास्टरमाइंड रफीकुल आलम को किया गिरफ्तार
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गुजरात क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए असम के एक 25 साल के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रफीकुल आलम के रूप में हुई है, जिसे असम के बारपेटा से एक बेहद सावधानीपूर्वक चलाए गए ऑपरेशन के बाद पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी एक विशाल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़ी है, जिसने पूरे भारत में 1090 साइबर अपराधों को अंजाम दिया है, जिसमें 1071 करोड़ 50 लाख रुपये की भारी भरकम राशि शामिल है। जांच से डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय हेरफेर के एक जटिल जाल का पता चला है, जिसके तार चीन में बैठे अपराधियों से जुड़े हुए हैं।

गिरफ्तारी और खुफिया ऑपरेशन का विवरण

रफीकुल आलम की गिरफ्तारी गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीसीई) द्वारा की गई एक विस्तृत जांच का परिणाम है। तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न पीड़ितों के बयानों के आधार पर, गुजरात सीआईडी की एक विशेष टीम को असम के बारपेटा शहर भेजा गया था। मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, टीम के सदस्यों ने अपना भेष बदला और तीन दिन तक संदिग्ध के घर की रेकी की। उसकी गतिविधियों और उपस्थिति की पुष्टि करने के बाद, टीम ने उसे उसके तकनीकी उपकरणों के साथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए गुजरात लाया गया है।

काम करने का तरीका: डिजिटल अरेस्ट और रैपिड ट्रांसफर

जांच में इस सिंडिकेट द्वारा नागरिकों को ठगने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले परिष्कृत तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। गिरोह की मुख्य रणनीतियों में से एक 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाला था और एक विशिष्ट मामले में, गिरोह ने महाराष्ट्र पुलिस और भारत के सुप्रीम कोर्ट के फर्जी पत्रों का उपयोग करके एक बुजुर्ग व्यक्ति को निशाना बनाया। कानूनी दबाव और डर का माहौल बनाकर, उन्होंने पीड़ित को बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। सीआईडी के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीसीई) ने पीड़ितों की काउंसलिंग के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे अलग-अलग राज्यों में ऐसे 10 और मामलों को होने से सफलतापूर्वक रोका गया।

एक बार जब धोखाधड़ी के माध्यम से पैसा प्राप्त हो जाता था, तो रफीकुल आलम वित्तीय निगरानी से बचने के लिए एक त्वरित वितरण रणनीति अपनाता था। मात्र एक घंटे के भीतर, चोरी किए गए धन को छोटी-छोटी राशियों में विभाजित किया जाता था और पूरे भारत में 1754 बैंक खातों के एक विशाल नेटवर्क में स्थानांतरित कर दिया जाता था। धन का यह तीव्र विखंडन इसलिए किया गया था ताकि वित्तीय निगरानी एजेंसियों के लिए वास्तविक समय में पैसे के स्रोत का पता लगाना लगभग असंभव हो जाए। जांच में इन अवैध लेनदेन के लिए कुल 1758 बैंक खातों के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय संबंध और क्रिप्टोकरेंसी का खेल

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू चीन में स्थित अपराधियों के साथ सीधा संबंध है और रफीकुल आलम कथित तौर पर व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से चीनी हैंडलर्स के साथ निरंतर संपर्क में था। वह इन चैनलों का उपयोग स्कैनर विवरण, उपयोगकर्ता आईडी, पासवर्ड और क्रिप्टो वॉलेट जानकारी सहित संवेदनशील वित्तीय जानकारी के आदान-प्रदान के लिए करता था। उसके मोबाइल फोन के तकनीकी विश्लेषण से 23 क्रिप्टो वॉलेट की उपस्थिति का पता चला, जिनमें 16 करोड़ रुपये का लेनदेन दर्ज था। इन पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन में गिरोह के सहयोगियों को भेजा गया था।

बरामद सबूत और पुलिस की कार्रवाई

गुजरात पुलिस यूनिट ने पुष्टि की है कि आरोपी देश भर में कुल 1090 साइबर अपराधों में शामिल था, जिसका कुल वित्तीय प्रभाव 1071 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है। डिजिटल अरेस्ट घोटालों के अलावा, जांच में 'चिप सेलर' नामक एप्लिकेशन के माध्यम से किए गए अवैध क्रिप्टोकरेंसी व्यापार के सबूत भी मिले हैं। इसके अलावा, संदिग्ध के मोबाइल फोन में कई गेमिंग अकाउंट लेनदेन के रिकॉर्ड पाए गए, जिनके बारे में माना जाता है कि वे अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने का एक और जरिया थे। सीआईडी इस विशाल वित्तीय साजिश में शामिल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में अधिक विवरण उजागर करने के लिए जब्त किए गए उपकरणों का विश्लेषण जारी रखे हुए है।

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