कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर छिड़े विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक बड़ा बयान दिया है। गोवा में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान खरगे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने वही वंदे मातरम् गाया है जिसे महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेता गाते थे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर उनका यह कृत्य गुनाह की श्रेणी में आता है, तो फिर गांधी और वाजपेयी जैसे नेताओं को भी उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। खरगे ने इस विवाद को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों पर पलटवार करते हुए अपनी बात रखी।
ऐतिहासिक परंपरा और खरगे का तर्क
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी पिछले 90 साल पुरानी परंपरा का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसी तरह वंदे मातरम् गाया था। खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके जन्म से बहुत पहले ही कांग्रेस ने यह तय कर लिया था कि देश के लिए कौन से राष्ट्रीय गीत अपनाए जाएंगे और उनके गायन की क्या प्रक्रिया होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ भाजपा के कह देने से कोई बात राष्ट्रीय नियम नहीं बन जाती, क्योंकि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं और भविष्य में कोई दूसरी सरकार आने पर नियम बदल सकते हैं।
गुनाह और कानूनी कार्रवाई पर खरगे के सवाल
विवाद पर अपनी सफाई देते हुए खरगे ने कहा कि अगर इस तरह से वंदे मातरम् गाना अपराध है, तो वे पिछले 18 साल से यही अपराध कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर यह वास्तव में कोई अपराध है, तो फिर गांधी जी, नेहरू जी और सरदार वल्लभभाई पटेल के खिलाफ भी केस दर्ज किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने भी इसी परंपरा को निभाया था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने भी वही वंदे मातरम् गाया था, इसलिए उन पर भी केस होना चाहिए। खरगे का तर्क था कि कांग्रेस केवल उस विरासत को आगे बढ़ा रही है जो दशकों से चली आ रही है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
वंदे मातरम् को लेकर यह विवाद 15 अगस्त के बाद तब शुरू हुआ जब भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाया। भाजपा का दावा था कि सोनिया गांधी के इशारे पर राष्ट्रगीत को बीच में ही रुकवा दिया गया था और यह मामला तब और ज्यादा गरमा गया जब गोवा में आयोजित एक कांग्रेस रैली के दौरान वंदे मातरम् के सभी छह छंदों के बजाय केवल पहले दो छंद ही गाए गए। भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत का अनादर बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की थी। इसी के जवाब में खरगे ने अब यह स्पष्टीकरण दिया है कि दो छंदों का गायन एक स्थापित परंपरा का हिस्सा है।
राजनीतिक गतिरोध और भविष्य की स्थिति
खरगे ने अपने बयान के अंत में यह दोहराया कि कांग्रेस अपनी 90 साल पुरानी परंपरा पर अडिग है। उन्होंने कहा कि भाजपा जो कहेगी वही अंतिम सत्य नहीं होगा। उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि राजनीतिक सत्ता परिवर्तनशील है और आज जो नियम भाजपा थोपना चाहती है, कल कोई दूसरी सरकार आने पर वे बदल सकते हैं। खरगे की इस सफाई ने वंदे मातरम् विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां अब बहस ऐतिहासिक परंपराओं और वर्तमान राजनीतिक व्याख्याओं के बीच सिमट गई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि वे अपनी पार्टी की ऐतिहासिक कार्यप्रणाली और महापुरुषों द्वारा अपनाए गए तरीकों से पीछे नहीं हटेंगे।