एचडीएफसी बैंक ने अपने नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को अपना नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की है। बैंक के निदेशक मंडल ने राजीव कुमार को 30 जून 2026 से प्रभावी चार साल की अवधि के लिए बैंक का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी मिलने के बाद, उन्हें मंजूरी की तारीख से तीन साल के लिए बैंक का अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा। राजीव कुमार भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं और उन्होंने फरवरी 2020 तक भारत के वित्त सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। वे 1984 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और उनके पास वित्तीय क्षेत्र का व्यापक अनुभव है।
अतनु चक्रवर्ती का लेंगे स्थान
राजीव कुमार बैंक में अतनु चक्रवर्ती की जगह लेंगे, जिन्होंने मार्च में नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बैंक ने बताया कि वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव के रूप में 2017 से 2020 के बीच राजीव कुमार ने तब जिम्मेदारी संभाली थी जब सरकारी बैंक कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे थे। उस समय बैंकों के पास बड़ी मात्रा में बिना पहचान वाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए), पूंजी की भारी कमी और कर्ज के गलत इस्तेमाल जैसे मुद्दे प्रमुख थे। कुमार ने अपनी ठोस नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए बैंकों के बही-खातों को साफ-सुथरा और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बैंकिंग सुधार और महत्वपूर्ण पहल
राजीव कुमार के कार्यकाल के दौरान बैंकिंग क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए। डीएफएस में शामिल होने के मात्र दो हफ्ते के भीतर ही लगभग 3 लाख 38 हजार शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे। इसके बाद पोंजी स्कीमों पर रोक लगाने के लिए 'बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट 2019' पास किया गया। उन्होंने एनपीए की पारदर्शी पहचान और उनके लिए प्रोविजनिंग को अनिवार्य बनाया और 'इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड' (आईबीसी) के तहत कर्ज लेने वालों की जवाबदेही तय की। बड़े डिफॉल्टरों को देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए 50 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा के लोन के लिए पासपोर्ट की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया।
वित्तीय मजबूती और बैंकों का विलय
बैंकिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए राजीव कुमार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी डालने (रीकैपिटलाइजेशन) की प्रक्रिया का नेतृत्व किया। इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति और लोन देने की क्षमता में सुधार हुआ। उनके नेतृत्व में ही 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मिलाकर 12 मजबूत बैंक बनाने की बड़ी विलय प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को भी 'एक राज्य - एक आरआरबी' के ढांचे में बदला गया और इस बीच, एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाला है। उम्मीद है कि बोर्ड उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए रिकमेंड करेगा, क्योंकि लॉ फर्मों ने बैंक को क्लीन चिट दे दी है और कुमार ने रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड और एसबीआई व नाबार्ड के बोर्ड में भी अपनी सेवाएं दी हैं।