भारत सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी जंग में एक बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी है कि ड्रग्स सिंडिकेट के टॉप माफिया और भगोड़े वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई, यूएई से भारत वापस लाया गया है। अमित शाह ने इसे मोदी सरकार की नशीले पदार्थों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया और उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि सरकार विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों का लगातार पता लगा रही है और उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रही है।
दुबई से गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 4310 के जरिए भारत लाया गया है। बसोया के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था, जिसके बाद उसे दुबई में गिरफ्तार किया गया। भारत सरकार की सक्रिय पहल और कूटनीतिक प्रयासों के बाद उसे डिपोर्ट किया गया है और गृह मंत्री ने बताया कि हमारी एजेंसियों ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाएं, वे भारतीय कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। बसोया दिल्ली पुलिस के 13000 करोड़ के ड्रग्स मामले के मुख्य आरोपी संदीप धुनिय का बेहद करीबी माना जाता है। हालांकि, संदीप धुनिय दुबई से पाकिस्तान भागने में सफल रहा है।
पुणे का 6000 करोड़ रुपये का ड्रग्स केस
वीरेंद्र सिंह बसोया पुणे के चर्चित 6000 करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में मुख्य आरोपी है। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में एक बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान पुलिस ने दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों के पास से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया था। जांच में यह बात सामने आई कि यह पूरा नेटवर्क एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व वीरेंद्र सिंह बसोया कर रहा था।
लंदन भेजने की थी बड़ी साजिश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, बरामद किए गए 970 किलो मेफेड्रोन की इस बड़ी खेप को लंदन भेजने की तैयारी थी। इस तस्करी के लिए डेल्टा लॉजिस्टिक्स नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया जाना था। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया पूरी तरह से वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देशों पर काम कर रहे थे और इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी 21 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था। यह नेटवर्क मेफेड्रोन की बड़ी मात्रा को देश से बाहर भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहा था।
परिवार पर भी कसता शिकंजा
वीरेंद्र सिंह बसोया की गिरफ्तारी के साथ ही उसके परिवार पर भी कानूनी शिकंजा कस गया है। बसोया के बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है, जो फिलहाल विदेश में छिपा हुआ बताया जा रहा है। 970 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी और 6000 करोड़ रुपये के इस काले कारोबार का पर्दाफाश होना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। वीरेंद्र बसोया का भारत लाया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार ड्रग माफियाओं के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।