कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है और अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर जनता की आवाज को अनसुना करने और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को दबाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में लोगों की समस्याओं को सुनने की इच्छाशक्ति का अभाव है, जिसके कारण समाज के विभिन्न वर्ग परेशान हैं।
जंतर-मंतर और उत्तराखंड न्याय का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में जंतर-मंतर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां छात्र अपनी आवाज उठाना चाहते थे और अपनी मांगों को सरकार के सामने रखना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें स्पष्ट रूप से कह दिया कि वे ऐसा नहीं कर सकते। राहुल गांधी के अनुसार, यह छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब देश का युवा अपनी बात नहीं कह पाता, तो यह लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
इसके साथ ही राहुल गांधी ने उत्तराखंड की एक बलात्कार पीड़िता के परिवार से अपनी मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उस परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने इस घटना को सरकार की संवेदनहीनता का उदाहरण बताया और कहा कि सरकार पीड़ितों की बात सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार लोगों की बात सुनना ही नहीं चाहती है और इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि हम इनको पागल कर देंगे।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर तीखी टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी रात को नहीं सोते हैं और इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें से कई कारण छुपे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस न किए जाने पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने एक पुराना वाकया साझा करते हुए कहा कि पहले वह इसे एक मार्केटिंग स्ट्रेटजी समझते थे, लेकिन जब वह प्रधानमंत्री के साथ 5 मिनट एक कमरे में बैठे, तो उन्हें समझ आया कि वह बहुत देर तक बोल नहीं सकते। उन्होंने संकेत दिया कि यही कारण है कि प्रधानमंत्री मीडिया के सवालों का सामना करने से बचते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने उन्हें सो-कॉल्ड चाणक्य और सरदार पटेल करार दिया। उन्होंने दावा किया कि अमित शाह संसद में घुस नहीं पाए और भाग गए क्योंकि वह पहली बार भारत का एक्सप्रेशन सुन रहे थे और राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष को जोकरों का समूह बताते हुए कहा कि इनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने उन लोगों की भी आलोचना की जो इस बल के आगे कायरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
आरएसएस की समझ और सुरक्षा पर बयान
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी विस्तार से बात की और उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों को भारत की वास्तविक समझ नहीं है। उनके अनुसार, 3000 साल पुराने भारत और आज के आधुनिक भारत के बीच के अंतर को समझना जरूरी है, जिसे आरएसएस समझने में विफल रहा है। अधिवेशन के दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद कुछ लोगों को आरएसएस को सैल्यूट करने के लिए भी कहा ताकि यह दिखाया जा सके कि संगठन का किस तरह इस्तेमाल हुआ है।
हालांकि, राहुल गांधी ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए यह भी कहा कि अगर कभी आरएसएस को दबाने की कोशिश की जाएगी, तो कांग्रेस उसकी रक्षा करने के लिए तैयार है। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद किसी भी संस्था को दबाना गलत है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह दोहराया कि वर्तमान में आरएसएस को आज के भारत की कोई समझ नहीं है।