विज्ञापन

होली 2026: सुख-समृद्धि के लिए इन सात स्थानों पर जलाएं दीपक

होली 2026: सुख-समृद्धि के लिए इन सात स्थानों पर जलाएं दीपक
विज्ञापन

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला होली का त्यौहार वर्ष 2026 में 4 मार्च को मनाया जाएगा। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से होली की रात को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। शास्त्रों में वर्ष की चार प्रमुख रात्रियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें 'महारात्रि' कहा जाता है। इनमें दीपावली, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि और होली की रात शामिल है। इन विशेष रात्रियों में किए जाने वाले अनुष्ठान, जप और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। विद्वानों के अनुसार, होली की रात नकारात्मक ऊर्जा के शमन और सकारात्मकता के संचार के लिए उपयुक्त समय होता है।

पीपल वृक्ष और पितृ शांति का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होली की रात पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस रात पीपल के वृक्ष के नीचे घी या तेल का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करने का विधान है। ज्योतिषीय और धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाएं दूर होती हैं। पीपल को देव वृक्ष माना गया है, इसलिए इस स्थान पर दीपदान करने से आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

मुख्य द्वार और दक्षिण-पश्चिम दिशा का विधान

वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, होली की रात घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर प्रकाश करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और इसके अतिरिक्त, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। परंपराओं के अनुसार, इस दिशा में दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और धन संबंधी समस्याओं का निवारण होता है।

पूजा स्थल और तुलसी के समीप दीपदान

होली की महारात्रि में घर के पूजा स्थल या मंदिर में अखंड दीपक या घी का दीपक जलाना अनिवार्य माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पूजा घर में प्रकाश करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर का वातावरण शुद्ध होता है और इसी प्रकार, घर के आंगन में स्थित तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना भी एक प्राचीन परंपरा है। तुलसी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और यहां दीपदान करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

होलिका दहन स्थल और रसोईघर की परंपरा

जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाता है, वहां दहन के पश्चात दीपक जलाना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। लोक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि की पवित्रता को बनाए रखने और घर में समृद्धि लाने के लिए उस स्थान पर दीपदान किया जाता है। इसके साथ ही, घर के रसोईघर में सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी परंपरा है और रसोईघर को अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है, और यहां दीपक जलाने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होने की मान्यता प्रचलित है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Zoom News एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।

विज्ञापन