पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा तनाव उभर कर सामने आ रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस यानी पारगमन शुल्क लगाने की तैयारी कर रहे हैं। यह रणनीतिक जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य के लिए एक जीवन रेखा के समान है और यदि हूतियों की यह योजना धरातल पर उतरती है, तो इसके वैश्विक व्यापारिक संचालन पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब हूतियों ने हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है। इस कदम का सीधा असर कच्चे तेल, एलएनजी और वैश्विक शिपिंग लागत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा और नियामक संस्था का गठन
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रांजिट फीस लगाने के इस विवादास्पद प्रस्ताव पर हूतियों ने ईरानी अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की है। यह बातचीत उस समय हुई जब हूतियों का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ईरान पहुंचा था। सूत्रों का दावा है कि ईरान ने हूतियों को इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी यानी नियामक संस्था बनाने की सलाह दी है। यह संस्था बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर लगने वाली फीस की निगरानी और उसके प्रबंधन का कार्य करेगी। हालांकि, अभी तक इस शुल्क को लागू करने के लिए किसी निश्चित समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस विचार ने वैश्विक व्यापार जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
चीनी जहाजों को मिल सकती है विशेष छूट
इस प्रस्तावित योजना में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि चीनी जहाजों को इस ट्रांजिट फीस से छूट दी जा सकती है और सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में चीन और हूती समूह के बीच सीधी बातचीत हुई है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले चीनी व्यापारिक और ऊर्जा जहाजों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि चीन, सऊदी अरब के कच्चे तेल का दुनिया में सबसे बड़ा आयातक है और लाल सागर का यह समुद्री मार्ग उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संभावित छूट इस समुद्री संघर्ष क्षेत्र में चल रही जटिल कूटनीति को दर्शाती है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय सरकार ने जताई कड़ी चिंता
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इन घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सरकार की नामित विदेश मंत्री अफराह अल-जोबा ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि हूती विद्रोही लाल सागर पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वे इस रणनीतिक मार्ग पर अपना वर्चस्व स्थापित करने में सफल हो जाते हैं, तो वे अंतरराष्ट्रीय जहाजों से जबरन ट्रांजिट शुल्क वसूलने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। यमन सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन और क्षेत्र को और अधिक अस्थिर करने वाला कदम मान रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है बाब अल-मंदेब स्ट्रेट?
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट की महत्ता को इसके भौगोलिक और आर्थिक प्रभाव से समझा जा सकता है। यह जलमार्ग यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र के बीच स्थित है और दक्षिणी लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोक पॉइंट्स में गिना जाता है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का शुल्क या सुरक्षा जोखिम वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। इस रास्ते से हर दिन लगभग 40 लाख से 80 लाख बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी दुनिया के विभिन्न कोनों तक पहुंचती है। यदि हूती यहां ट्रांजिट फीस लागू करते हैं, तो शिपिंग की लागत में भारी वृद्धि होगी। इसका सीधा असर तेल की कीमतों, वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता पर पड़ेगा। इसके साथ ही, लाल सागर क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और अधिक गहरा सकता है, जिससे हूतियों का अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ सैन्य टकराव बढ़ने की पूरी संभावना है।