यूक्रेन युद्ध पर पुतिन ने मोदी और जिनपिंग की शांति पहल का किया स्वागत, ट्रंप की कोशिशें नाकाम

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यूक्रेन युद्ध पर पुतिन ने मोदी और जिनपिंग की शांति पहल का किया स्वागत, ट्रंप की कोशिशें नाकाम
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता में मदद की पेशकश की है। क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रविवार को जानकारी दी कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनकी तैयारी का स्वागत किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता कराने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार कोशिशें अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी हैं।

ब्रिक्स समिट में दिखी नेताओं की केमिस्ट्री

ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन के बीच गहरा तालमेल और दोस्ती साफ तौर पर दिखाई दी। समिट के पहले दिन की सबसे चर्चित तस्वीर वह थी जिसमें तीनों नेता मुस्कुराते हुए और एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए नजर आए। इस तस्वीर ने न केवल इन वैश्विक नेताओं के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को दर्शाया, बल्कि वर्तमान की अस्थिर वैश्विक व्यवस्था के बीच एकता का एक मजबूत संदेश भी दिया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस ने शांति बातचीत में मदद के लिए विशेष रूप से पीएम मोदी की पहल की सराहना की है। यह पहल उस समय हुई है जब अमेरिका भी रूस और यूक्रेन के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने का रास्ता तलाश रहा है।

ट्रंप की कूटनीति और मौजूदा चुनौतियां

शांति की यह नई पहल ऐसे समय में आई है जब डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति बेअसर साबित होती दिख रही है। कुछ ही दिन पहले ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात की थी और यूक्रेन में लड़ाई को जल्द खत्म करने की अपील की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया था कि युद्ध खत्म होने से अमेरिका और रूस के रिश्ते पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यह बातचीत ट्रंप के दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के मॉस्को और कीव के दौरे के बाद हुई थी। कुशनर, जो ट्रंप के दामाद भी हैं, ने इस लड़ाई को खत्म करने का रास्ता निकालने की कोशिश की थी जो अब लगभग 5 साल से चल रही है। हालांकि, इस भारी-भरकम डिप्लोमेसी से अब तक कोई खास परिणाम नहीं निकला है।

शांति दूत के रूप में भारत की भूमिका

भारत इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में उभरा है। भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिसके रूस और यूक्रेन दोनों के साथ कामकाजी और कूटनीतिक रिश्ते बरकरार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास मॉस्को, तेहरान और पश्चिमी देशों से एक साथ संवाद करने की अद्वितीय क्षमता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से मिलने वाले रियायती तेल पर निर्भर है, लेकिन इसके बावजूद उसने 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन से कई बार शांति की अपील की है। पिछले महीने बिश्केक में एससीओ समिट के दौरान मोदी ने पुतिन से एंडलेस वॉर से एंड ऑफ वॉर की ओर बढ़ने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि युद्ध में बिताया गया हर दिन इंसानियत को पीछे धकेलता है।

भविष्य की संभावनाएं और कूटनीतिक समीकरण

प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 के एससीओ समिट में भी पुतिन से कहा था कि आज का जमाना जंग का जमाना नहीं है। हाल ही में शुक्रवार को हुई द्विपक्षीय बातचीत में मोदी ने फिर दोहराया कि बातचीत और डिप्लोमेसी ही झगड़ों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता है और भारत शांति की हर कोशिश में मदद के लिए तैयार है। क्रेमलिन ने भी स्वीकार किया है कि यूक्रेन पर भारत का नजरिया काफी हद तक रूस के नजरिए से मेल खाता है क्योंकि दोनों ही शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। इस बीच, युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन और जेलेंस्की की पहली आमने-सामने की मुलाकात इस साल दिसंबर की शुरुआत में मियामी में होने वाले G20 समिट के दौरान हो सकती है। जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि यदि पुतिन वहां आते हैं, तो वह भी शामिल होंगे। वहीं, रूस 18-20 सितंबर को अपने पहले संसदीय चुनाव की तैयारी कर रहा है, जहां पुतिन समर्थित यूनाइटेड रशिया पार्टी के दबदबे की उम्मीद है।

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