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हुसैन उस्तारा: दाऊद इब्राहिम को चुनौती देने वाले गैंगस्टर पर आधारित फिल्म 'ओ रोमियो'

हुसैन उस्तारा: दाऊद इब्राहिम को चुनौती देने वाले गैंगस्टर पर आधारित फिल्म 'ओ रोमियो'
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मुंबई के सिनेमाई पर्दे पर एक बार फिर अंडरवर्ल्ड की गलियों की गूंज सुनाई दे रही है। विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित फिल्म 'ओ रोमियो' आज बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है। इस फिल्म में अभिनेता शाहिद कपूर एक ऐसे किरदार को निभा रहे हैं, जो वास्तविक जीवन के गैंगस्टर हुसैन उस्तारा से प्रेरित बताया जा रहा है और 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में मुंबई का अंडरवर्ल्ड अपने सबसे हिंसक दौर से गुजर रहा था। उस समय दाऊद इब्राहिम का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था और शहर के अधिकांश छोटे गिरोह या तो उसके साथ मिल रहे थे या खत्म हो रहे थे। ऐसे माहौल में हुसैन उस्तारा एक ऐसा नाम बनकर उभरा, जिसने न केवल अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी, बल्कि दाऊद के वर्चस्व को सीधी चुनौती भी दी।

1980 के दशक की मुंबई और अपराध का उदय

उस दौर की मुंबई आज के महानगर से काफी अलग थी और कपड़ा मिलों के बंद होने और बेरोजगारी बढ़ने के कारण युवाओं का एक बड़ा वर्ग अपराध की दुनिया की ओर आकर्षित हो रहा था। बंदरगाहों के जरिए होने वाली तस्करी और उगाही के धंधे ने अंडरवर्ल्ड को फलने-फूलने का मौका दिया। हुसैन शेख, जो बाद में हुसैन उस्तारा के नाम से मशहूर हुए, इसी माहौल की उपज थे। उन्होंने डोंगरी और दक्षिण मुंबई के इलाकों में अपनी पैठ बनाई। उस समय के अन्य गैंगस्टरों के विपरीत, हुसैन का काम करने का तरीका काफी शांत और योजनाबद्ध था। अधिकारियों के अनुसार, वह कम बोलने और सटीक कार्रवाई करने के लिए जाने जाते थे, जिसने उन्हें अंडरवर्ल्ड में एक रहस्यमयी और खतरनाक छवि प्रदान की।

हुसैन शेख से 'उस्तारा' बनने की कहानी

हुसैन शेख को 'उस्तारा' का उपनाम एक विशेष हिंसक घटना के बाद मिला था। अपराध जगत के जानकारों और लेखकों के अनुसार, एक गैंगवार के दौरान हुसैन ने पारंपरिक हथियारों के बजाय एक बेहद तेज धार वाले उस्तरे (रेजर) का इस्तेमाल किया था। उनके वार इतने सटीक थे कि प्रतिद्वंद्वी गिरोह के सदस्यों में उनका खौफ बैठ गया। इस घटना के बाद पुलिस रिकॉर्ड और अंडरवर्ल्ड की फाइलों में उनका नाम हुसैन उस्तारा दर्ज हो गया और यह नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि उनके काम करने के तरीके का प्रतीक बन गया था। उन्होंने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए कभी भी बड़े हथियारों का सहारा नहीं लिया, बल्कि उस्तरे की धार से ही अपना वर्चस्व कायम किया।

दाऊद इब्राहिम के खिलाफ स्वतंत्र रुख

जब दाऊद इब्राहिम ने दुबई से अपना नेटवर्क फैलाना शुरू किया, तो उसने मुंबई के छोटे गिरोहों को अपने अधीन करने की कोशिश की। कई बड़े नाम दाऊद के डी-कंपनी के सामने झुक गए, लेकिन हुसैन उस्तारा ने अपनी स्वायत्तता बनाए रखी। उन्होंने दाऊद के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया, जिसे उस समय एक आत्मघाती कदम माना जाता था। उस्तारा का यह विरोध केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि यह क्षेत्रीय नियंत्रण की लड़ाई थी और उन्होंने उन लोगों को भी समर्थन दिया जो दाऊद के खिलाफ थे। इसी क्रम में उनका नाम सपना दीदी जैसी शख्सियतों के साथ भी जुड़ा, जिन्होंने अपने निजी प्रतिशोध के लिए दाऊद के खिलाफ मोर्चा खोला था। उस्तारा ने उन्हें प्रशिक्षित करने और रणनीतिक मदद देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

फिल्म 'ओ रोमियो' और सिनेमाई चित्रण

विशाल भारद्वाज की फिल्म 'ओ रोमियो' इसी पृष्ठभूमि को पर्दे पर उतारने का प्रयास करती है और फिल्म में शाहिद कपूर 'उस्तारा' नामक एक हिटमैन की भूमिका में हैं। हालांकि निर्माताओं ने इसे पूरी तरह से बायोपिक नहीं कहा है, लेकिन फिल्म के किरदार और घटनाएं हुसैन उस्तारा के जीवन से काफी मिलती-जुलती हैं। फिल्म में उस्तारा के हिंसक जीवन और उसके भावनात्मक पक्ष के बीच के द्वंद्व को दिखाया गया है। तृप्ति डिमरी ने फिल्म में अफ्शा का किरदार निभाया है, जो कहानी में रोमांस और जटिलता का तड़का लगाती है। टीजर और ट्रेलर में शाहिद कपूर का लुक और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार सीधे तौर पर असली हुसैन उस्तारा की याद दिलाते हैं।

अंडरवर्ल्ड इतिहास और वर्तमान चर्चा

हुसैन उस्तारा की कहानी आज भी मुंबई के अपराध इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति ने उस दौर के सबसे शक्तिशाली सिंडिकेट के खिलाफ खड़े होने का साहस किया। फिल्म 'ओ रोमियो' के माध्यम से युवा पीढ़ी को उस दौर के संघर्ष और अंडरवर्ल्ड की आंतरिक राजनीति को समझने का मौका मिल रहा है और हालांकि फिल्म में काल्पनिक पुट दिया गया है, लेकिन इसकी मूल प्रेरणा वही वास्तविक घटनाएं हैं जिन्होंने दशकों पहले मुंबई की सड़कों पर खून बहाया था। उस्तारा का नाम आज भी उन लोगों की सूची में शामिल है जिन्होंने अंडरवर्ल्ड के नियमों को अपनी शर्तों पर चुनौती दी थी।

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