भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तापमान में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक जा सकता है और टेम्प्रेचर का आंकड़ा 40 डिग्री सेल्सियस तापमान को पार करेगा। तापमान बढ़ने के साथ-साथ उमस भी धीरे-धीरे बढ़ रही है और मौसम की भविष्यवाणी में स्पष्ट किया गया है कि तापमान बढ़ने के साथ उमस भरी गर्मी का खतरा भी बढ़ेगा।
उमस वाली गर्मी क्यों ज्यादा खतरनाक?
सामान्य गर्मी के मुकाबले उमस भरी गर्मी के खतरनाक होने के पीछे वैज्ञानिक कारण है। सामान्यतः जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर से पसीना निकलता है और यही पसीना शरीर को ठंडा करने का काम करता है। मौसम विभाग का कहना है कि तापमान का आंकड़ा 40 डिग्री सेल्सियस को पार करेगा। उमस वाली गर्मी में स्थिति इसके उलट होती है क्योंकि इसमें शरीर ठंडा नहीं हो पाता। जब हवा में नमी की मात्रा ज्यादा होती है, तो पसीना नहीं सूख पाता और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती।
इसका परिणाम यह होता है कि गर्मी में शरीर को ठंडा करने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं करता और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। इससे हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। उमस भरे मौसम में चक्कर आना, बेहोशी छाना और तेज बुखार के मामले बढ़ जाते हैं। यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। ऐसी स्थिति में हवा भारी महसूस होती है, शरीर जल्दी थकता है और कुछ लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है।
कब पड़ती है उमस वाली गर्मी और बारिश का प्रभाव
नमी या उमस वाली गर्मी तब पड़ती है जब तापमान अधिक हो और हवा में नमी ज्यादा हो। ऐसी स्थिति में पसीना आसानी से नहीं सूखता और घुटन महसूस होती है। आमतौर पर इसकी शुरुआत मई और जून से होती है। बारिश आने से पहले हवा में नमी की मात्रा बढ़ती है और मानसून के दौरान जुलाई से सितंबर के बीच उमस और ज्यादा रहती है। यह विशेष रूप से उन जगहों पर अधिक होती है जो समुद्री इलाकों के पास हैं या जहां हवा का बहाव कम होता है। अक्सर बारिश के बाद उमस बढ़ जाती है क्योंकि बारिश होने पर गर्म जमीन से भाप उठती है। यही कारण है कि बारिश के दौरान राहत मिलती है, लेकिन रुकते ही उमस बढ़ जाती है।