भारतीय क्रिकेट टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज का आगाज 22 अक्टूबर से करना है, लेकिन इस दौरे पर टीम इंडिया के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी हो गई है जो मैच के नतीजों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने इस सीरीज में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड का मौसम और समय का अंतर रहने वाला है। आम तौर पर जब न्यूजीलैंड में कोई डे-नाइट टी20 मैच आयोजित किया जाता है तो उसके शुरू होने का निर्धारित समय शाम 6 बजे होता है। इसका मतलब यह होता है कि शाम 6 बजे मैच शुरू होता है और रात 9 बजे तक मुकाबला समाप्त हो जाता है। लेकिन भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जाने वाली इस टी20 सीरीज का समय रात 8 बजे से तय किया गया है।
न्यूजीलैंड की सरजमीं पर इस सीरीज का दो घंटे देरी से शुरू होने के पीछे मुख्य वजह भारत और न्यूजीलैंड के बीच का समय का अंतर है। जब न्यूजीलैंड में रात के 8 बज रहे होंगे, उस समय भारत में दोपहर के 12 बजकर 30 मिनट हो रहे होंगे। भारतीय समयानुसार प्राइम टाइम या प्रसारण की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ही इस समय का चयन किया गया है, लेकिन यही वजह है कि न्यूजीलैंड में मैच दो घंटे की देरी से शुरू हो रहा है। खेल प्रेमियों और प्रसारकों के लिए यह समय भले ही अनुकूल हो, लेकिन दो घंटे देरी से मैच होने का साइड-इफेक्ट सीधे तौर पर टीम इंडिया पर पड़ सकता है और यह स्थिति भारतीय टीम के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकती है और रात 8 बजे शुरू होने वाला यह मुकाबला टीम इंडिया पर भारी पड़ सकता है।
क्राइस्टचर्च में रात 8 बजे क्या बदल जाता है?
क्राइस्टचर्च के स्थानीय मौसम की बात करें तो आजकल वहां दोपहर के समय में काफी ज्यादा धूप खिली रहती है और मौसम सामान्य रहता है और लेकिन जैसे ही रात के 8 बजते हैं, हालात पूरी तरह से बदलने लगते हैं। रात 8 बजे के बाद यहां काफी तेज हवाएं चलने लगती हैं और मौसम में अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाती है, जिससे तापमान काफी ज्यादा नीचे चला जाता है। क्राइस्टचर्च स्थित हेगले ओवल स्टेडियम के ठीक पीछे पहाड़ मौजूद हैं और इन पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण मैदान पर ओस का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भारतीय टीम ने अपनी प्रैक्टिस आमतौर पर दिन के समय या दोपहर में की है, लेकिन मुकाबले असल में रात के वक्त खेले जाएंगे। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों के लिए अचानक बदलते हुए मौसम के साथ तालमेल बैठाना बेहद मुश्किल हो सकता है।
न्यूजीलैंड के इस विशिष्ट मैदान पर शाम ढलने के बाद गेंद काफी ज्यादा स्विंग हो सकती है, जिससे भारत के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों को शुरुआत में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, पिच पर थोड़ा समय बिताने और सेट होने के बाद वहां रन भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन भारतीय घरेलू कंडिशंस की तरह वहां क्रीज पर उतरते ही ताबड़तोड़ छक्के लगाना किसी भी बल्लेबाज के लिए बहुत ज्यादा मुश्किल साबित होगा। गेंदबाजों के लिए यह समय अनुकूल हो सकता है, लेकिन बल्लेबाजों को अपनी तकनीक और संयम का पूरा परिचय देना होगा।
हेगले ओवल मैदान के आंकड़े और इतिहास
न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में स्थित हेगले ओवल मैदान का इतिहास काफी पुराना है और यह मैदान साल 1886 में खुला था। इस ऐतिहासिक मैदान पर अब तक कुल 19 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा चुके हैं, जिनके आंकड़े काफी दिलचस्प हैं। इन 19 मैचों में से 9 मुकाबलों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जीत हासिल की है, जबकि 10 मैचों में लक्ष्य का पीछा (चेज) करने वाली टीम ने जीत दर्ज की है। इन आंकड़ों से साफ है कि इस मैदान पर टॉस और पहले या बाद में बल्लेबाजी करने का बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता है, बल्कि मैच की परिस्थितियों का सही आकलन करना ज्यादा जरूरी होता है।
हेगले ओवल मैदान के स्कोरिंग पैटर्न की बात करें तो यहां पहली पारी में औसत स्कोर महज 159 रन का रहता है। वहीं, दूसरी पारी में इस मैदान का औसत स्कोर गिरकर सिर्फ 129 रन रह जाता है, जो यह साबित करता है कि जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता है और रात गहरी होती जाती है, बल्लेबाजी करना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस मैदान पर सबसे बड़ा स्कोर इंग्लैंड की टीम ने बनाया था, जिसने यहां 236 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके विपरीत, इस मैदान पर सबसे कम स्कोर मात्र 32 रन का है, जो बांग्लादेश की महिला टीम के नाम दर्ज है। इसके अलावा, हेगले ओवल मैदान पर सबसे बड़ा सफलतापूर्वक चेज होने वाला स्कोर 177 रन है, जो पाकिस्तान की पुरुष टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ एक मुकाबले में हासिल किया था। इन तमाम आंकड़ों और मौसम की मार को देखते हुए टीम इंडिया के कप्तान और कोच को अपनी रणनीति में आवश्यक बदलाव करने होंगे ताकि न्यूजीलैंड के इस कठिन इम्तिहान में टीम सफलता हासिल कर सके।