नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य और भारत की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल युग में सूचनाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एआई-जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट लेबलिंग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह पहचानना जरूरी है कि कौन सा कंटेंट असली है और कौन सा एआई द्वारा तैयार किया गया है। यह समिट 20 फरवरी तक चलेगी, जिसमें 110 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 100 से अधिक वैश्विक सीईओ शामिल हो रहे हैं।
एआई कंटेंट की प्रामाणिकता और डीपफेक पर नियंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल कंटेंट पर 'ऑथेंटिसिटी लेबल' होना अनिवार्य होना चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक का विकास इस तरह होना चाहिए कि वह समाज में भ्रम पैदा न करे और डीपफेक के बढ़ते खतरों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई-जनरेटेड कंटेंट और वास्तविक कंटेंट के बीच का अंतर स्पष्ट होना चाहिए ताकि नागरिकों को गुमराह होने से बचाया जा सके। उन्होंने तकनीकी कंपनियों से ऐसी प्रणालियां विकसित करने का आह्वान किया जो सामग्री के स्रोत और उसकी प्रकृति को पारदर्शी बना सकें।
'ग्लास बॉक्स' दृष्टिकोण और डेटा संप्रभुता
प्रधानमंत्री ने एआई प्लेटफॉर्म्स के संचालन में पारदर्शिता की मांग करते हुए 'ग्लास बॉक्स' दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि एआई को 'ब्लैक बॉक्स' की तरह काम नहीं करना चाहिए, जहां इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया गुप्त हो। इसके बजाय, एआई के सुरक्षा नियम और एल्गोरिदम इतने स्पष्ट होने चाहिए कि उन्हें सत्यापित किया जा सके। डेटा के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने 'गार्बेज इन, गार्बेज आउट' के सिद्धांत का उल्लेख किया और कहा कि यदि डेटा सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं होगा, तो आउटपुट भी खतरनाक हो सकता है। उन्होंने एक वैश्विक विश्वसनीय डेटा फ्रेमवर्क बनाने का सुझाव दिया जो डेटा संप्रभुता का सम्मान करे।
भारत का एआई मिशन और जीपीयू क्षमता विस्तार
भारत की तकनीकी बुनियादी ढांचे की प्रगति पर जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में वर्तमान में 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) मौजूद हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगले 6 महीनों के भीतर भारत में 24,000 नए GPUs और जोड़े जाएंगे, जिससे देश की एआई प्रोसेसिंग क्षमता में भारी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत एआई को केवल सत्ता के उपकरण के रूप में नहीं बल्कि सेवा के माध्यम के रूप में देखता है। उन्होंने यूपीआई और कोविन जैसे सफल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई को 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए सुलभ और कल्याणकारी बनाया जाना चाहिए।
मुकेश अंबानी का ₹10 लाख करोड़ का निवेश और रोजगार पर रुख
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने समिट के दौरान भारत में 'इंटेलिजेंस युग' की शुरुआत के लिए ₹10 लाख करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने एआई के कारण नौकरियों के जाने के डर को खारिज करते हुए कहा कि यह तकनीक नौकरियां नहीं छीनेगी, बल्कि उच्च-कौशल वाले कार्यों के नए अवसर पैदा करेगी। अंबानी के अनुसार, एआई मानव श्रम का पूरक बनेगा और उत्पादकता में सुधार लाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत एआई क्रांति का नेतृत्व करेगा और यह निवेश देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगा।
मानवीय नियंत्रण और 'पेपर क्लिप प्रॉब्लम' की चेतावनी
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के विकास में मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की चेतावनी दी। उन्होंने 'पेपर क्लिप प्रॉब्लम' नामक तकनीकी उदाहरण के माध्यम से समझाया कि यदि किसी मशीन को बिना मानवीय मूल्यों और नियंत्रण के केवल एक लक्ष्य दे दिया जाए, तो वह उसे पूरा करने के लिए संसाधनों का विनाशकारी उपयोग कर सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई की दिशा और उसके उपयोग की सीमाएं हमेशा इंसानों द्वारा ही तय की जानी चाहिए। समिट में आज 20 से अधिक देशों के प्रमुख और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जो वैश्विक एआई गवर्नेंस पर चर्चा कर रहे हैं।