टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम का प्रदर्शन परिणामों के लिहाज से उत्कृष्ट रहा है। टीम ने अपने चारों मैच जीतकर सुपर-8 चरण के लिए मजबूती से क्वालीफाई किया है। हालांकि, इस सफलता के बावजूद टीम इंडिया की एक बड़ी तकनीकी कमजोरी सामने आई है जिसने टीम प्रबंधन और प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है और टूर्नामेंट के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय खिलाड़ियों ने फील्डिंग के दौरान कई महत्वपूर्ण मौके गंवाए हैं। सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी आक्रामक टीमों के खिलाफ होने वाले मुकाबलों से पहले यह कमजोरी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
कैच ड्रॉप के चौंकाने वाले आंकड़े और प्रतिशत
टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज के समापन के बाद जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय टीम ने अब तक कुल 9 कैच छोड़े हैं। यह संख्या टूर्नामेंट में भाग ले रही 20 टीमों में दूसरी सबसे अधिक है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की कैचिंग सफलता का प्रतिशत 70% से भी नीचे गिर गया है। इसका अर्थ यह है कि हर मैच में औसतन 2 से 3 कैच छोड़े जा रहे हैं। आधुनिक टी20 क्रिकेट में जहां एक अतिरिक्त रन या एक विकेट मैच का परिणाम बदल सकता है, वहां फील्डिंग में इस तरह की लापरवाही टीम के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। आयरलैंड की टीम 10 कैच ड्रॉप के साथ इस सूची में शीर्ष पर है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर बना हुआ है।
अन्य अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ तुलनात्मक स्थिति
हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान और कनाडा जैसी टीमें, जिन्हें अक्सर फील्डिंग के मामले में कमजोर माना जाता है, इस टूर्नामेंट में भारत से बेहतर स्थिति में नजर आई हैं। पाकिस्तान और कनाडा के खिलाड़ियों ने भारत की तुलना में कम कैच छोड़े हैं और उनकी ग्राउंड फील्डिंग में भी अधिक तत्परता देखी गई है। भारतीय टीम, जिसे दुनिया की सबसे फिट और बेहतरीन फील्डिंग वाली टीमों में गिना जाता है, का इस सूची में निचले पायदान पर होना विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है और यह आंकड़े दर्शाते हैं कि केवल आयरलैंड को छोड़कर बाकी सभी 18 टीमों ने कैच पकड़ने के मामले में भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है।
मैदान पर प्रमुख खिलाड़ियों की चूक और घटनाएं
टूर्नामेंट के दौरान कई ऐसे मौके आए जब अनुभवी खिलाड़ियों से भी गलतियां हुईं। नीदरलैंड्स के खिलाफ खेले गए मैच में सूर्यकुमार यादव और रिंकू सिंह के बीच एक कैच लेने के दौरान मैदान पर टकराव की स्थिति बन गई थी। हालांकि इस घटना में किसी खिलाड़ी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन इसने टीम के बीच आपसी तालमेल की कमी को उजागर किया। इसी तरह, पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मैच में कुलदीप यादव और विकेटकीपर ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों ने भी कैच छोड़े थे। इन गलतियों के कारण विपक्षी बल्लेबाजों को जीवनदान मिला और टीम पर दबाव बढ़ता गया। बड़े मैचों में इस तरह की चूक विपक्षी टीम को वापसी करने का पूरा अवसर प्रदान करती है।
सुपर-8 चरण की चुनौतियां और रणनीतिक प्रभाव
भारतीय टीम अब सुपर-8 चरण में प्रवेश कर रही है, जहां उसका सामना दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज जैसी टीमों से होगा। ये टीमें अपनी पावर-हिटिंग और तेज खेल के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में अगर भारतीय फील्डर कैच छोड़ते हैं, तो विपक्षी बल्लेबाज इसका फायदा उठाकर मैच को भारत की पकड़ से दूर ले जा सकते हैं। टीम प्रबंधन के अनुसार, फील्डिंग में सुधार के बिना नॉकआउट मैचों में जीत सुनिश्चित करना कठिन होगा। सुपर-8 के मैच अधिक दबाव वाले होते हैं और यहां एक छोटी सी गलती भी पूरे टूर्नामेंट से बाहर होने का कारण बन सकती है। इसलिए, बैटिंग और बॉलिंग के साथ-साथ फील्डिंग को भी समान प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है।
फील्डिंग ड्रिल्स और अभ्यास सत्रों पर विशेष ध्यान
आगामी मैचों की तैयारी के लिए भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ ने फील्डिंग ड्रिल्स पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, अभ्यास सत्रों के दौरान खिलाड़ियों को हाई-कैचिंग, स्लिप फील्डिंग और बाउंड्री पर डाइव लगाने के विशेष अभ्यास कराए जा रहे हैं। फील्डिंग कोच खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत रूप से काम कर रहे हैं ताकि कैचिंग तकनीक और मैदान पर तालमेल को सुधारा जा सके। टीम इंडिया के लिए यह एक चेतावनी की तरह है कि वह अपनी फील्डिंग को विश्व स्तरीय मानकों पर वापस लाए। टूर्नामेंट के अंतिम चरणों में पहुंचने के लिए केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी का अच्छा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फील्डिंग में भी शत-प्रतिशत योगदान देना आवश्यक है।