भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक समझौता हुआ है जिसने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी है। इंडिया एनर्जी वीक 2026 के भव्य उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। इस समझौते को पीएम मोदी ने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया है और यह डील न केवल भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि इसे डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों के लिए एक बड़े झटके के रूप में भी देखा जा रहा है।
ऐतिहासिक समझौते का आगाज और पीएम मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा। कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ इस समझौते को अंतिम रूप दिया। 2007 से लंबित पड़ी यह बातचीत आखिरकार 2026 में एक ठोस नतीजे पर पहुंची है। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अटूट विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी साझा समृद्धि और वैश्विक स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा व्यापक असर
इस समझौते की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं। इसके अलावा, दुनिया के कुल व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा इन्हीं दो क्षेत्रों के बीच होता है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह डील वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। इससे न केवल व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे। यह समझौता लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के साथ-साथ चीन जैसे देशों के आर्थिक प्रभुत्व को संतुलित करने में भी मदद करेगा।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मिलेंगे नए पंख
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र को मिलेगा। 'मेक इन इंडिया' अभियान को इससे जबरदस्त बूस्ट मिलने की उम्मीद है। भारतीय उत्पादों के लिए यूरोप के विशाल बाजार के दरवाजे खुल जाएंगे, जिससे निर्यात में भारी बढ़ोतरी होगी और साथ ही, आईटी और अन्य सेवा क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करने के अवसर सुगम होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत में वैश्विक निवेशकों के विश्वास। को और अधिक मजबूत करेगा, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा।
ट्रंप प्रशासन और अमेरिका को लगा बड़ा झटका
इस डील के राजनीतिक मायने भी बहुत गहरे हैं। इसे डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और उनके संभावित टैरिफ युद्ध के खिलाफ एक सुरक्षा कवच माना जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पहले ही इस पर नाराजगी जाहिर की है और उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ भारत के जरिए रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को फंड कर रहा है। हालांकि, भारत और ईयू ने इन दबावों को दरकिनार करते हुए अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दी है। यह समझौता दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर डील करने की क्षमता रखता है।
हैदराबाद हाउस की वो 'पावरफुल' तस्वीर
समझौते के बाद हैदराबाद हाउस से सामने आई पीएम मोदी, एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में तीनों नेताओं के चेहरे की मुस्कान और आत्मविश्वास यह बयां कर रहा है कि आने वाला समय भारत और यूरोप की जुगलबंदी का है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तस्वीर वैश्विक कूटनीति में एक नए युग की शुरुआत है, जहां भारत एक ग्लोबल पावरहाउस के रूप में उभर चुका है।