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भारत EU व्यापार समझौता: किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला, नहीं घटेगी इन चीजों पर ड्यूटी

भारत EU व्यापार समझौता: किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला, नहीं घटेगी इन चीजों पर ड्यूटी
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत में मोदी सरकार ने एक बेहद कड़ा और किसानों के पक्ष में रुख अपनाया है। वैश्विक दबाव के बावजूद, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और इस ऐतिहासिक बातचीत में भारत ने उन संवेदनशील क्षेत्रों की एक लंबी सूची तैयार की है, जिन्हें आयात शुल्क में किसी भी प्रकार की छूट से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

इन उत्पादों पर नहीं मिलेगी कोई छूट

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने डेयरी, चावल, गेहूं, दालें, चाय, कॉफी और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों जैसे क्षेत्रों को 'सेंसिटिव लिस्ट' में रखा है और इसका मतलब यह है कि यूरोपीय देशों से आने वाले इन उत्पादों पर मौजूदा आयात शुल्क बरकरार रहेगा। सरकार का यह कदम सीधे तौर पर उन करोड़ों किसानों को सुरक्षा प्रदान करता है जो इन फसलों की खेती पर निर्भर हैं। यदि इन पर ड्यूटी हटाई जाती, तो यूरोपीय बाजारों से सस्ते आयात की बाढ़ आ सकती थी, जिससे स्थानीय बाजार की कीमतें गिर जातीं।

डेयरी सेक्टर पर भारत का सख्त रुख

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और यहाँ का डेयरी क्षेत्र मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों द्वारा संचालित होता है। मोदी सरकार ने अपनी नीति स्पष्ट रखी है कि किसी भी देश के साथ FTA में डेयरी सेक्टर को कभी भी इम्पोर्ट ड्यूटी में छूट नहीं दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि डेयरी सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। इसके अलावा, मछली और समुद्री उत्पाद, पोल्ट्री, चीज़, मक्का, मेवे, खाद्य तेल, फल, सब्जियां, मसाले और तंबाकू जैसे क्षेत्रों को भी सुरक्षा कवच दिया गया है।

यूरोपीय संघ ने भी सुरक्षित रखे अपने हित

यह समझौता केवल भारत की ओर से ही एकतरफा नहीं है और यूरोपीय संघ ने भी अपने 27 सदस्य देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ उत्पादों को डील के दायरे से बाहर रखा है। इसमें मांस और मांस से जुड़े उत्पाद, शहद, चावल, डेयरी उत्पाद, चीनी और तंबाकू शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच यह संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है कि व्यापार तो बढ़े, लेकिन घरेलू उद्योगों को नुकसान न पहुंचे।

भारतीय निर्यात के लिए खुलेंगे नए रास्ते

भले ही भारत ने कुछ क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है, लेकिन इस FTA से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी खुशखबरी भी है। समझौते के तहत, भारत के कई कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजार में जीरो या बहुत कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा और भारत को मसाले, टेबल ग्रेप्स, चाय और कॉफी जैसे उत्पादों की लगभग 87 फीसदी श्रेणियों में यूरोपीय बाजारों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलेगी।

समुद्री उत्पादों के एक्सपोर्ट में होगा इजाफा

यूरोपीय संघ वर्तमान में कुछ समुद्री उत्पादों पर 0 से 26 फीसदी तक का शुल्क लगाता है और इस समझौते के बाद इन शुल्कों में भारी कटौती की उम्मीद है। वर्तमान में यूरोपीय संघ का समुद्री आयात बाजार लगभग 4. 67 लाख करोड़ रुपये का है। शुल्क कम होने से भारतीय मछुआरों और समुद्री खाद्य निर्यातकों को एक बहुत। बड़ा बाजार मिलेगा, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी होगी।

छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका की सुरक्षा

मोदी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर छोटे किसानों पर पड़ेगा। भारत में कृषि जोत का आकार छोटा है और किसान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के सामने संवेदनशील होते हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार तक पहुंच देने के चक्कर में स्थानीय किसानों की आजीविका दांव पर न लगे और यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को और मजबूती प्रदान करता है।

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