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सरकार का स्पष्टीकरण: देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार, अफवाहों से बचें

सरकार का स्पष्टीकरण: देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार, अफवाहों से बचें
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केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर विराम लगा दिया है और आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत में ईंधन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण उत्पन्न हुई चिंताओं के बीच, पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार के इस भरोसे के बाद गैस एजेंसियों पर लगने वाली भीड़ में कमी आई है और उपभोक्ता अब घबराहट में बुकिंग करने के बजाय सामान्य रूप से सेवाएं ले रहे हैं।

पैनिक बुकिंग में भारी गिरावट और डिजिटल रुझान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में एलपीजी की पैनिक बुकिंग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है और 8 लाख से घटकर अब 77 लाख पर आ गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं का डर कम हो रहा है। इसके साथ ही, तेल कंपनियों द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान के परिणामस्वरूप ऑनलाइन गैस बुकिंग का प्रतिशत 84 प्रतिशत से बढ़कर 87 प्रतिशत हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से गैस एजेंसियों पर भौतिक भीड़ कम हुई है, जिससे वितरण प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।

रिफाइनरियों की क्षमता और उत्पादन की स्थिति

ईंधन की उपलब्धता पर जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि देश की सभी तेल रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। भारत वर्तमान में पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की स्थिति में है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, घरेलू मांग को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित रखा गया है। तेल कंपनियों ने पुष्टि की है कि देशभर में किसी भी पेट्रोल पंप या एलपीजी वितरक के पास स्टॉक खत्म होने यानी 'ड्राई-आउट' की कोई भी घटना रिपोर्ट नहीं की गई है। आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए डिपो स्तर पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई

ईंधन की कमी की अफवाहों का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आंध्र प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए सघन छापेमारी की जा रही है और सरकारी तेल कंपनियों के निरीक्षण दल गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। आपूर्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के प्रबंधन का जिम्मा 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को सौंपा गया है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिल सके।

आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष आपूर्ति प्रबंध

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और घरेलू उपभोक्ताओं जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ईंधन की आपूर्ति निर्बाध रहेगी। पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस की आपूर्ति को वर्तमान में 80 प्रतिशत तक नियंत्रित किया गया है ताकि घरेलू क्षेत्र पर कोई दबाव न पड़े। इसके अतिरिक्त, एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य कर दिया गया है और इस कदम का उद्देश्य वितरण व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और प्रभावी बनाना है।

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