भारत सरकार ने मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आपूर्ति की स्थिति पर आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति संतुलित बनी हुई है। सरकार के अनुसार, कच्चे तेल की उपलब्धता सामान्य है और देश भर की रिफाइनरियां बिना किसी बाधा के अपनी पूर्ण क्षमता के साथ परिचालन कर रही हैं। मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनी हुई है और देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की कमी या 'ड्राई-आउट' जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।
मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि मध्य पूर्व में होने वाली किसी भी बड़ी घटना का प्रभाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कुल एलपीजी (LPG) आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत और एलएनजी (LNG) का 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है। वर्तमान युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकार हर स्तर पर निगरानी कर रही है और दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पेट्रोल पंपों पर परिचालन सामान्य है और उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग से बचने का सुझाव दिया गया है।
रिफाइनरियों का संचालन और आपूर्ति की स्थिति
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश की सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियां वर्तमान में अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार कार्य कर रही हैं। कच्चे तेल के आयात के लिए वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित व्यवधान से निपटा जा सके। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कच्चे तेल का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क को सुव्यवस्थित रखें ताकि अंतिम छोर तक आपूर्ति में कोई देरी न हो।
पीएनजी और सीएनजी वितरण पर सरकार का जोर
सरकार ने प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और वाहनों के लिए सीएनजी (CNG) की आपूर्ति 100 प्रतिशत स्तर पर जारी है। औद्योगिक और व्यावसायिक एलपीजी उपयोगकर्ताओं को पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क पहले से मौजूद है। सीजीडी कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया को तेज करें और उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करें और 25 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं, जो एलपीजी पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम
ईंधन की संभावित कमी की अफवाहों के बीच होने वाली कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ समन्वय स्थापित किया है। संयुक्त सचिव ने बताया कि राज्यों ने जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं और संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है। तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों को भी नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट की स्थिति का लाभ उठाकर अनुचित लाभ कमाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 31 राज्यों में जिला स्तरीय निगरानी केंद्र स्थापित किए गए हैं जो आपूर्ति श्रृंखला की पल-पल की जानकारी केंद्र को भेज रहे हैं।
प्राकृतिक गैस की खपत और आयात का गणित
पीआईबी (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल प्राकृतिक गैस की खपत लगभग 189 MMSCMD है। 5 MMSCMD गैस का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाता है, जबकि शेष हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है। 4 MMSCMD गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते से आता है। इस मार्ग पर बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ा है, लेकिन सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से इसे प्रबंधित करने का प्रयास किया है।
राज्यों की भूमिका और निगरानी तंत्र
वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर जमाखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा है। वर्तमान में 17 राज्यों ने कमर्शियल गैस के लिए और 15 राज्यों ने केरोसिन के लिए एलोकेशन ऑर्डर जारी कर दिए हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि उपभोक्ताओं को निर्धारित मूल्य पर ही ईंधन प्राप्त हो। सरकार ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।