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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ डूबे
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में अस्थिरता का माहौल रहा। कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 2700 अंक तक गिर गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी में 700 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के परिणामस्वरूप, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग ₹427 लाख करोड़ रह गया।

26% यानी 2,496 अंकों की गिरावट के साथ 74,207 के स्तर पर बंद हुआ। 15 पर स्थिर हुआ। बाजार में आई इस सुनामी के कारण एक ही दिन में निवेशकों के लगभग ₹13 लाख करोड़ स्वाहा हो गए। सेंसेक्स के सभी 30 प्रमुख शेयर लाल निशान में बंद हुए, जो बाजार में व्यापक बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव

बाजार में गिरावट का एक मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमत $116 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। कतर की प्रमुख तेल कंपनी के अनुसार, ईरान के मिसाइल हमले से एलएनजी प्लांट को महत्वपूर्ण क्षति हुई है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा गैस सुविधाओं को बंद करने के निर्णय ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अमेरिका की ओर से ईरान को दी गई चेतावनियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। 75% के स्तर पर बरकरार रखा है। चेयरमैन जेरोम पॉवेल के अनुसार, मुद्रास्फीति उम्मीद के अनुरूप कम नहीं हो रही है, जिसके कारण इस वर्ष केवल एक बार दर कटौती की संभावना जताई गई है। 7% रह सकती है, जो पिछले अनुमानों से अधिक है। इस सख्त नीतिगत रुख के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम कम करने की प्रवृत्ति देखी गई।

वैश्विक बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि

भारतीय बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। 63% नीचे बंद हुए। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 4% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% तक गिर गया। 77% पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड में इस वृद्धि ने इक्विटी बाजारों से पूंजी के बहिर्वाह को तेज कर दिया है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये का अवमूल्यन

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने हाल ही में ₹2,714 करोड़ के शेयर बेचे, जो उनकी बिकवाली का लगातार 14वां दिन था। इसके अलावा, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल के आयात की बढ़ती लागत के कारण व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका है, जिससे रुपये पर दबाव बना हुआ है और बाजार में पिछले कुछ समय से जारी तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी इस गिरावट में योगदान दिया।

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