इकरा की रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, जानें आंकड़े

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इकरा की रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, जानें आंकड़े
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रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अपने ताजा अनुमान जारी किए हैं, जो काफी चौंकाने वाले हैं। इकरा की इस रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह विकास दर पिछले चार तिमाहियों के निचले स्तर पर हो सकती है। 8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इकरा ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि घरेलू गतिविधियां मजबूत होने के बावजूद बाहरी कारकों ने विकास की गति को थोड़ा धीमा किया है।

क्षेत्रवार विकास और औद्योगिक प्रदर्शन का विश्लेषण

इकरा रेटिंग्स ने जून तिमाही के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला है। 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 9 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। हालांकि सेवा क्षेत्र में सुधार दिख रहा है, लेकिन रिपोर्ट में एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। जून तिमाही में सेवा क्षेत्र की कंपनियों की कारोबारी धारणा में उल्लेखनीय कमजोरी देखी गई है। पश्चिम एशिया संकट और लगातार बढ़ती मजदूरी लागत के दबाव के कारण व्यापारिक आशावाद की गति पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है।

पश्चिम एशिया संघर्ष और सप्लाई चेन पर असर

जब से मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ है, तब से सप्लाई की चिंताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके साथ ही खाद और दूसरे जरूरी सामानों की सप्लाई में भी कमी देखने को मिली है। इस स्थिति ने देश की इकोनॉमी को काफी बड़ा झटका दिया है। वास्तव में इस युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं और खाद की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिल रहा है। आयात के साथ-साथ निर्यात में भी रुकावट आने से देश की कमाई पर काफी ब्रेक लगा है। इकरा की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो कि पहले के अनुमानित आंकड़ों से कम है।

मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के विचार

इकरा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने इस रिपोर्ट पर अपनी विस्तृत राय दी है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों के विभिन्न आंकड़ों से जून तिमाही में घरेलू गतिविधियों की एक अच्छी तस्वीर सामने आई है। इससे पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तिमाही के दौरान जिंस कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताएं कुछ हद तक कम हुई हैं। 8 प्रतिशत थी। यह अनुमान तिमाही के लिए मौद्रिक नीति समिति के वृद्धि अनुमान के बिल्कुल अनुरूप है।

कच्चे तेल की कीमतें और भविष्य का अनुमान

7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 7 प्रतिशत की वृद्धि दर से कम है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता के कारण वृद्धि के जोखिम अभी भी बने हुए हैं। हालांकि, उन्होंने एक सकारात्मक पहलू भी बताया है। 9 प्रतिशत रही थी।

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