ईरान और अमेरिका के बीच पिछले सात महीनों से जारी तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस पर दबाव बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत दुनिया भर में ईरानी विमानों को दी जाने वाली सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के वैश्विक नेटवर्क से बाहर करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। यह कदम ईरान के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक दबाव की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमेरिकी चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय डॉलर सिस्टम का खतरा
अमेरिका का यह फैसला केवल ईरानी विमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन विदेशी कंपनियों को भी लपेटे में लिया गया है जो ईरानी एयरलाइंस को ईंधन, लैंडिंग या अन्य तकनीकी सेवाएं प्रदान करती हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि जो भी देश या कंपनी इस प्रतिबंध का उल्लंघन करेगी, उसे अंतरराष्ट्रीय डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। यह एक ऐसी आर्थिक चोट है जिससे बचना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा डॉलर पर ही आधारित है। इस चेतावनी ने दुनिया भर की विमानन कंपनियों और सरकारों को सोच में डाल दिया है।
दुनिया भर में दिखने लगा असर
अमेरिकी दबाव का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इराक ने 23 सितंबर से बगदाद एयरपोर्ट पर ईरानी उड़ानों को रोकने का फैसला किया है। ओमान ने भी पहले ही ईरानी एयरलाइन महान एयर की उड़ानों पर अपने यहां रोक लगा दी है और इसके अलावा, जॉर्जिया ने ईरानी विमानों के अपने एयरस्पेस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। तुर्की के मामले में, महान एयर ने स्वयं जानकारी दी है कि तुर्की सरकार के अनुरोध के बाद उसने वहां के लिए अपनी उड़ान सेवाएं रोक दी हैं। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अमेरिका का आर्थिक दबाव कई देशों पर काम कर रहा है।
चीन और रूस का रुख
जहां एक तरफ कई देश अमेरिकी प्रतिबंधों के आगे झुकते नजर आ रहे हैं, वहीं चीन और रूस ने इन पाबंदियों को स्वीकार करने का कोई संकेत नहीं दिया है। चीन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंधों को लागू नहीं करेगा और उसने इस कदम को अवैध करार दिया है। पाकिस्तान और तुर्किये जैसे देशों के लिए भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि उन्हें अपने आर्थिक हितों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
भारत के सामने बड़ी चुनौती
भारत के लिए यह फैसला लेना आसान नहीं है। भारत के एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ उसके पुराने व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते हैं। वर्तमान में भारत और तेहरान के बीच महान एयर और ईरान एयर की उड़ानें संचालित होती हैं। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत से ईरान के लिए सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 1,69,000 बताई गई है। इसका मतलब है कि हर रोज का औसत 5000 से ज्यादा यात्रियों का होता है, जिसमें कनेक्टिंग फ्लाइट के यात्री भी शामिल हैं। भारत सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन आने वाले दिनों में भारत का रुख इस वैश्विक विवाद में बेहद महत्वपूर्ण होगा।