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भारत में एलपीजी उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ा, सरकार ने किल्लत की खबरें नकारीं

भारत में एलपीजी उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ा, सरकार ने किल्लत की खबरें नकारीं
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केंद्र सरकार ने मंगलवार को देश में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कमी से जुड़ी तमाम चिंताओं और खबरों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, देश में एलपीजी का उत्पादन 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है ताकि घरेलू और वाणिज्यिक मांग को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि देश की सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियां अपनी पूरी स्थापित क्षमता के साथ उत्पादन कर रही हैं, जिससे बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी हुई है।

घरेलू आपूर्ति और वितरण नेटवर्क की स्थिति

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 60 लाख एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति की जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए, यदि कहीं स्थानीय स्तर पर कमी देखी जाती है, तो उसे औद्योगिक क्षेत्र से गैस डाइवर्ट करके तुरंत पूरा किया जा रहा है। वितरण नेटवर्क की दक्षता पर जानकारी देते हुए बताया गया कि वितरकों के पास स्टॉक पहुंचने की अवधि अभी भी ढाई दिन बनी हुई है, जो सामान्य स्थिति का परिचायक है। सरकार ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं है।

जमाखोरी रोकने के लिए बुकिंग नियमों में संशोधन

बाजार में एलपीजी सिलेंडरों की कृत्रिम कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने विनियामक कदम उठाए हैं। इसके तहत एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग की समय सीमा में बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ता 21 दिनों के अंतराल पर सिलेंडर बुक कर सकते थे, जिसे अब बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडरों का वितरण वास्तविक जरूरतों के आधार पर हो और बिचौलियों द्वारा स्टॉक को अवैध रूप से जमा न किया जा सके। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन क्षेत्रों में लागू की गई है जहां मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन की खबरें प्राप्त हुई थीं।

आयात मार्गों में रणनीतिक बदलाव और सुरक्षा

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार ने जानकारी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील मार्गों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक मार्गों से आयात बढ़ाया गया है। पहले इन पारंपरिक मार्गों से लगभग 55 प्रतिशत तेल और गैस का आयात होता था, जिसे अब अन्य सुरक्षित रूटों के माध्यम से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। इस रणनीतिक विविधीकरण का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बावजूद घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर रखना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में एलपीजी की कीमतों में की गई ₹60 की बढ़ोतरी वर्तमान संकट का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पिछले वर्ष की अंडर-रिकवरी की भरपाई के लिए लिया गया निर्णय है।

वाणिज्यिक क्षेत्र की शिकायतों पर सरकारी रुख

देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर दिल्ली जैसे महानगरों में रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों द्वारा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। दिल्ली के रेस्टोरेंट संगठनों ने दावा किया था कि उनके पास केवल एक से दो दिन का स्टॉक बचा है और आपूर्ति अचानक बाधित हुई है। इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि वाणिज्यिक सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि का लाभ जल्द ही वाणिज्यिक क्षेत्र को भी मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि आपूर्ति में कोई स्थायी बाधा नहीं है और स्थानीय लॉजिस्टिक मुद्दों को तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के माध्यम से हल किया जा रहा है।

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