विज्ञापन

शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी: सेंसेक्स 640 अंक चढ़ा, निवेशकों की संपत्ति बढ़ी

शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी: सेंसेक्स 640 अंक चढ़ा, निवेशकों की संपत्ति बढ़ी
विज्ञापन

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 10 मार्च को पिछले दो सत्रों की गिरावट के बाद जोरदार वापसी देखी गई। 98 के स्तर पर बंद हुआ। 60 पर पहुंच गया। 50 lakh crore की वृद्धि हुई। इससे पहले, वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में करीब 3% का सुधार देखा गया था।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी खरीदारी का व्यापक रुझान रहा। 04% की बढ़त के साथ बंद हुआ। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹441 lakh crore से बढ़कर लगभग ₹447 lakh crore हो गया। बाजार में इस सकारात्मक बदलाव के पीछे भू-राजनीतिक तनाव में कमी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में सुधार को मुख्य कारण माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत

बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के जल्द समाप्त होने की संभावना जताई। ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव उनके द्वारा पहले अनुमानित चार सप्ताह की समय सीमा से काफी पहले खत्म हो सकता है और उनके अनुसार, ईरान की वायुसेना और नौसेना को हुए नुकसान के बाद तेहरान की स्थिति कमजोर हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध विराम की इन उम्मीदों ने वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया, जिसका सीधा सकारात्मक असर भारतीय इक्विटी बाजार पर पड़ा।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक आपूर्ति

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 9% गिरकर $90 प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि वह तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी नौसेना को तैनात करने पर विचार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, G7 देशों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अपने आपातकालीन भंडार (Stockpiles) से तेल जारी करने की तैयारी दिखाई है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

भारतीय मुद्रा में सुधार और डॉलर की स्थिति

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई मजबूती ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया। 8050 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। 33 पर बंद हुआ था। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के कारण रुपये में यह सुधार देखा गया। मुद्रा बाजार में स्थिरता आने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के बीच भारतीय बाजार को लेकर विश्वास में वृद्धि हुई है।

विभिन्न क्षेत्रों में वैल्यू बाइंग और मिडकैप का प्रदर्शन

हालिया गिरावट के बाद कई प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन पर खरीदारी (Value Buying) देखी गई। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 3% से अधिक की तेजी रही, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) का इंडेक्स 2% से ज्यादा चढ़ा। निफ्टी बैंक और वित्तीय सेवा सूचकांकों में भी लगभग 2% की बढ़त दर्ज की गई। 4% की वृद्धि हुई। 46% की गिरावट के साथ बंद होने वाला एकमात्र प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, लार्ज-कैप शेयरों में सुधार के बाद अब ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेतक

2% से घटकर 4% के स्तर पर आने से बाजार को मजबूती मिली। बॉन्ड यील्ड में कमी इस बात का संकेत है कि निवेशक अब सुरक्षित संपत्तियों (Safe Haven) से हटकर इक्विटी जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। भू-राजनीतिक जोखिमों के कम होने की संभावना ने वैश्विक निवेशकों को उभरते बाजारों, विशेषकर भारत की ओर आकर्षित किया है और इन वैश्विक कारकों के समन्वय ने घरेलू बाजार में बिकवाली के दबाव को कम करने और खरीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विज्ञापन