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भारत-मलेशिया द्विपक्षीय वार्ता: स्वास्थ्य और सुरक्षा समेत 11 समझौतों पर हस्ताक्षर

भारत-मलेशिया द्विपक्षीय वार्ता: स्वास्थ्य और सुरक्षा समेत 11 समझौतों पर हस्ताक्षर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मलेशिया यात्रा के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ क्वालालंपुर में उच्च स्तरीय डेलिगेशन वार्ता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत और अधिक मजबूत करना था। वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया, जिसमें स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा, श्रम और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

रणनीतिक क्षेत्रों में 11 समझौतों पर मुहर

डेलिगेशन लेवल की बातचीत के बाद भारत और मलेशिया ने कुल 11 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में स्वास्थ्य सेवा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और मलेशिया के बीच सहयोग अब कृषि और विनिर्माण से आगे बढ़कर एआई (AI), स्वच्छ ऊर्जा और कौशल विकास तक फैल गया है। दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और समुद्री सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया और उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया समुद्री पड़ोसी हैं और वैश्विक अस्थिरता के वर्तमान माहौल में दोनों देशों को अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। सुरक्षा क्षेत्र में काउंटर-टेररिज्म, इंटेलिजेंस शेयरिंग और मैरीटाइम सिक्योरिटी में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान (ASEAN) की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और विश्वास जताया कि इससे भारत-आसियान संबंध और गहरे होंगे।

आर्थिक प्रगति और स्थानीय मुद्रा में व्यापार

मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि की सराहना की और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिदृश्य में एक शानदार बढ़त बताया। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्रा के उपयोग को बढ़ावा देने के फैसले को एक बड़ी उपलब्धि करार दिया और 59 बिलियन के व्यापार लक्ष्य से आगे बढ़ने की योजना पर भी चर्चा हुई। इब्राहिम ने शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' की प्रशंसा करते हुए कहा कि मलेशियाई छात्र अब पश्चिमी संस्थानों के बजाय भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

पर्यटन और राजनयिक संबंधों का विस्तार

पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कोटा किनाबालु और सबा में नया कॉन्सुलेट खोलने का निर्णय लिया है, जिसे मलेशियाई सरकार ने तुरंत समर्थन दिया। वीजा उदारीकरण और बेहतर हवाई संपर्क के माध्यम से दोनों देशों के बीच लोगों के जुड़ाव को बढ़ाने पर सहमति बनी है और मलेशिया में रहने वाले लगभग 30 लाख भारतीय मूल के नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का कार्य कर रहे हैं। पीएम मोदी ने इस डायस्पोरा के प्रति मलेशियाई प्रधानमंत्री के स्नेह की सराहना की।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भविष्य की राह

राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को नई गति प्रदान करेगी। सेमीकंडक्टर और डिजिटल तकनीक में साझेदारी भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है और विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने से डॉलर पर निर्भरता कम होगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा। वैश्विक शांति प्रयासों, विशेषकर यूक्रेन और मध्य पूर्व के मुद्दों पर पीएम मोदी के रुख की मलेशियाई नेतृत्व ने विशेष रूप से सराहना की है।

निष्कर्षतः, यह यात्रा भारत और मलेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को आधुनिक तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी में बदलने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना मिलकर करने के लिए तैयार हैं।

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