प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे के दूसरे दिन भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ा है। कुआलालंपुर के पेरदाना पुत्रा भवन में प्रधानमंत्री मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच उच्च स्तरीय वार्ता संपन्न हुई और इस बैठक का मुख्य केंद्र आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई, समुद्री सुरक्षा, और आर्थिक सहयोग को विस्तार देना रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और मलेशिया आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करेंगे।
आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख और सुरक्षा सहयोग
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा के मोर्चे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों देश आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाएंगे। उन्होंने समुद्री सुरक्षा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया। रक्षा सहयोग को और अधिक व्यापक बनाने पर सहमति बनी है, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी शामिल है। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में भारत की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
सांस्कृतिक सेतु के रूप में तमिल भाषा का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में तमिल भाषा को भारत और मलेशिया के बीच एक मजबूत भावनात्मक कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि मलेशिया के सांस्कृतिक, शैक्षिक और मीडिया जीवन में तमिल भाषा की जीवंत उपस्थिति दोनों देशों को करीब लाती है। हाल ही में हुए ऑडियो-विजुअल समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय फिल्में, विशेषकर तमिल सिनेमा और संगीत, दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक निकटता को और बढ़ाएंगे और यह सांस्कृतिक कूटनीति जन-संबंधों को मजबूत करने का एक प्रमुख जरिया बनकर उभरी है।
आर्थिक साझेदारी और स्थानीय मुद्रा में व्यापार
59 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। एक महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय के तहत, दोनों देशों ने अब स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट और यूपीआई डिजिटल इंटरफेस जैसी सुविधाओं की घोषणा की। 10वें CEO फोरम में सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश पर चर्चा की गई।
11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर और भविष्य की रूपरेखा
इस यात्रा के दौरान भारत और मलेशिया के बीच कुल 11 दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। इन समझौतों में स्वास्थ्य सेवा, शांति स्थापना, डिजिटल तकनीक और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। मलेशिया ने साबाह राज्य के कोटा किनाबालू में भारत का नया वाणिज्य दूतावास खोलने के निर्णय का स्वागत किया है और प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने वैश्विक शांति प्रयासों, विशेषकर यूक्रेन-रूस संघर्ष और गाजा संकट पर प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की।
विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य और निष्कर्ष
राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, 1957 से चले आ रहे संबंधों को 2024 में 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में बदलना दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति की सफलता को दर्शाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्थानों की बढ़ती वैश्विक साख के कारण मलेशिया अब अपने छात्रों को भारत भेजने के लिए अधिक उत्सुक है। यह दौरा न केवल व्यापारिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि डिजिटल और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों को एक-दूसरे का पूरक बनाता है।