ग्लासगो में आयोजित 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स का 2 अगस्त को शानदार समापन हो गया है। 23 जुलाई से शुरू हुए इन खेलों में कुल 13 खेलों का आयोजन किया गया था, जिसमें दुनिया भर के 74 देशों के एथलीटों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भारत के लिए यह प्रतियोगिता बेहद सफल रही और भारतीय दल ने कुल 39 पदकों के साथ अपने सफर का अंत किया। इन 39 पदकों में 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पदक तालिका में चौथे स्थान पर काबिज होने में सफल रहा।
6 प्रमुख खेलों के बिना भारत का चमत्कार
भारत की यह सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि इस बार उन 6 खेलों को प्रतियोगिता से बाहर रखा गया था जो भारत के लिए पदक की गारंटी माने जाते हैं। क्रिकेट, टेबल टेनिस, रेसलिंग, हॉकी, बैडमिंटन और स्क्वैश ऐसे खेल थे जिनमें भारत ने बर्मिंघम 2022 में कुल 30 पदक जीते थे। ग्लासगो 2026 में इन खेलों के न होने के बावजूद भारत ने 13 स्वर्ण सहित 39 पदक जीतकर दुनिया को हैरान कर दिया है। यह प्रदर्शन भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती विविधता और अन्य खेलों में उनकी मजबूती को दर्शाता है।
बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारत की इस कामयाबी में सबसे बड़ी भूमिका बॉक्सिंग और एथलेटिक्स के खिलाड़ियों ने निभाई है। भारतीय मुक्केबाजों ने रिंग में अपना दबदबा कायम करते हुए 7 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक अपने नाम किए। अगर पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स से तुलना करें तो भारतीय मुक्केबाजों ने इस बार 3 पदक ज्यादा जीते हैं। बर्मिंघम में मुक्केबाजों ने 3 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य के साथ कुल 7 पदक जीते थे।
एथलेटिक्स के क्षेत्र में भी भारत को जबरदस्त फायदा हुआ है और पदकों की संख्या पिछले बार के मुकाबले दोगुनी हो गई है। ग्लासगो 2026 में भारत ने एथलेटिक्स में 3 स्वर्ण, 7 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 16 पदक जीते हैं। बर्मिंघम 2022 में भारत एथलेटिक्स में केवल 8 पदक ही जीत सका था, जिसमें 1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य शामिल थे। पदकों की यह बढ़ोतरी भारतीय एथलीटों की कड़ी मेहनत और बेहतर तैयारी का परिणाम है।
जूडो और अन्य खेलों का योगदान
जूडो के खेल में भी भारतीय खिलाड़ियों ने ग्लासगो में अपनी चमक बिखेरी। भारत ने जूडो में कुल 4 पदक जीते, जिसमें 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक शामिल है। बर्मिंघम में हुए 22वें कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत के पदकों की संख्या 3 थी, जिसमें 2 रजत और 1 कांस्य शामिल था। हालांकि वेटलिफ्टिंग और पैरा पावरलिफ्टिंग में पदकों की संख्या पिछले खेलों के मुकाबले थोड़ी कम रही, लेकिन बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और जूडो में मिली बड़ी सफलता ने भारत को 39 पदकों के आंकड़े तक पहुंचा दिया।
तैयारी पर खर्च हुए 53 करोड़ 9 लाख रुपये
खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे सरकार और खेल संघों द्वारा किया गया भारी निवेश भी एक बड़ा कारण है। ग्लासगो 2026 की तैयारी के लिए ACTC और TOPS के माध्यम से कुल 53 करोड़ 9 लाख रुपये खर्च किए गए। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को दिया गया, जिसे अपने खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि मिली। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को भी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए ताकि खिलाड़ियों को हर जरूरी सुविधा मिल सके।
इसी तरह इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन को 5 करोड़ रुपये से 7 करोड़ 50 लाख रुपये के बीच की राशि मिली। जिमनास्टिक, जूडो, साइकलिंग, स्विमिंग, लाउन बाउल्स और पैरा एथलेटिक्स जैसे खेल संघों के बीच 15 करोड़ 59 लाख रुपये से 18 करोड़ 9 लाख रुपये बांटे गए। इन पैसों का उपयोग खिलाड़ियों को विदेशी दौरों पर भेजने और उनकी ट्रेनिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में किया गया। 39 पदकों की यह जीत इसी निवेश का परिणाम है।
ग्लासगो से विदाई और अहमदाबाद का स्वागत
ग्लासगो में खेलों के समापन के साथ ही अब सबकी नजरें 4 साल बाद होने वाले 24वें कॉमनवेल्थ गेम्स पर टिक गई हैं, जिसका आयोजन अहमदाबाद में किया जाएगा। समापन समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स फ्लैग भारतीय दिग्गज नीरज चोपड़ा को सौंपा गया। नीरज चोपड़ा ने इस ध्वज को भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के हवाले किया। यह पल भारत के लिए गौरवपूर्ण था, जो अब अगले खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।